भास्कर न्यूज|कुडू कुडू थाना क्षेत्र के सुकुरहुटू गांव स्थित सात पेड़ों के बीच बसी दयामयी देवी मां सतबहिनी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। पिछले कई वर्षों से मां सतबहिनी मंदिर पर पूजा-अर्चना का रिवाज है। लोग नए वर्ष के पहले दिन एक जनवरी को मंदिर पहुंचते है पूजा-अर्चना करते है और साल भर सुख समृद्धि की कामना करते है। वहीं सैकड़ों श्रद्धालु ऐसे हैं जिन्हें मां पर अटूट भरोसा है। मंदिर जिस समय छोटे स्वरूप में बना था उस वक्त भी यहां सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते थे। सतबहिनी मंदिर में भक्तों की मांगी गई हर मुरादें लोगों की पूरी हुई है। यही कारण है कि यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, नवरात्र में मंदिर की सजावट की जाती है। नवमी व विजयादशमी के दिन लोग अपने अपने परिवार के साथ आकर मां के चरणों में नारियल प्रसाद व चुनरी चढ़ा कर उनसे मन्नतें मांगते है। मां सतबहिनी मंदिर की प्रसिद्धि खासकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने के कारण ही हुई है, मंदिर की स्थापना काल से ही सच्चाई है कि मां सबकी मुरादें पूरी करते आईं है। सुबह 4 बजे से ही मंदिर में पूजा-अर्चना करने वालों की भीड़ उमड़ती है, लाल पुष्पों से सजी डोलनी ले महिलाएं मां को प्रसन्न करने के लिए नारियल, प्रसाद, चुनरी का चढ़ाया करती है। लोग बताते है क्षेत्र के लोहरदगा के तत्कालीन सांसद स्व. ललित उरांव ने सांसद मद से मंदिर का चारदीवारी कराया था वही जिले के पूर्व विधायक स्व. कमल किशोर भगत विधायक बनने से पूर्व 2002 से ही सतबहिनी मंदिर पहुंच कर मां भगवती का आशीर्वाद लेते थे। उन्होंने मन्दिर में मन्नत मांगी थी विधायक बनने के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाएगा। जिसके बाद 2009 में विधायक बने उसके बाद मंदिर की चारदीवारी निर्माण कराया। जिसके बाद सतबहिनी मंदिर और प्रसिद्ध हुआ। अभी के समय में सांसद, विधायक, स्थानीयजन प्रतिनिधि सहित अन्य शुभ कार्यों का शुरुआत मंदिर में पूजा-अर्चना कर करते है। मां सतबहिनी का स्वरूप सात पेड़ों पर बसा है। जिसमें गूलर, पाकर, डूमर, रोड़ी, जामुन, पीपल, बरगद के विशालकाय पेड़ों के बीच बसी है। इसी के कारण सतबहिनी नाम पड़ा है। यहां पर पूजा अर्चना के लिए कुडू, लोहरदगा, सिंजो, बारीडीह, उमरी, कोलसिमरी, लावागाई, जिमा, भंडरा, लोहरदगा, रांची, गुमला सहित अन्य जगहों के लोग पहुंच मां के चरणों में मत्था टेकते है और पेड़ों के तनो पर चुनरी बांध कर मनोकामना मांगते है। पूर्ण होने पर भक्ति भाव से सतबहिनी मन्दिर पहुंच पूजा अर्चना करते है।


