मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं इन दिनों कार्यवाहक कुलगुरु भरोसे चल रही हैं। नए कुलगुरु की चयन प्रक्रिया में हो रही अत्यधिक देरी ने न केवल विश्वविद्यालय के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि हजारों छात्रों और नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों की चिंता भी बढ़ा दी है। नियमों के मुताबिक कुलगुरु की नियुक्ति के लिए एक सर्च कमेटी का गठन अनिवार्य है, जिसमें चार प्रमुख प्रतिनिधि होते हैं। हालांकि सुविवि ने गत 9 दिसंबर को ही अपनी बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की बैठक में अपने हिस्से का नॉमिनी चुनकर राजभवन को भेज दिया था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी अन्य तीन महत्वपूर्ण नियुक्तियां लंबित हैं। राज्यपाल, यूजीसी, राज्य सरकार के नॉमिनी ही घोषित नहीं यदि ये नियुक्तियां दिसंबर में हो जातीं, तो फरवरी के अंत तक उदयपुर को नया कुलगुरु मिल सकता था। अब यह प्रक्रिया अप्रैल से पहले पूरी होती नहीं दिख रही है। कार्यवाहक कुलगुरु की सीमाएं
वर्तमान में कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत के पास सुविवि का अतिरिक्त प्रभार है। नियमों (जून 2018 के आदेश) के अनुसार, कार्यवाहक कुलगुरु न तो कोई नीतिगत निर्णय ले सकते हैं और न ही नई भर्तियां कर सकते हैं। इसका सीधा असर निम्नलिखित कार्यों पर पड़ रहा है। इसमें विश्वविद्यालय में 25 शैक्षणिक और 58 गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती का रोस्टर राज्य सरकार से मंजूर हो चुका है, लेकिन स्थायी कुलगुरु के बिना यह प्रक्रिया अगले छह माह तक शुरू होना संभव नहीं है। ये समस्याएं आ रहीं नियमित नेतृत्व के अभाव में परीक्षाओं के समयबद्ध आयोजन और परिणामों की घोषणा में देरी हो रही है। सुविवि के 6 मुख्य संगठक कॉलेजों और करीब 190 संबद्ध कॉलेजों के 1.50 लाख छात्रों की शिक्षा फिलहाल भगवान भरोसे है। कुलगुरु का पद के लिए जिम्मेदारी और योग्यता
विश्वविद्यालय का कुलगुरु मुख्य कार्यकारी और अकादमिक अधिकारी होता है। उसके कंधों पर प्रशासनिक अनुशासन, बजट प्रबंधन, और दीक्षांत समारोह जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी होती है। इस पद के लिए 10 वर्ष का प्रोफेसर के रूप में अनुभव अनिवार्य है। फिलहाल इस पद के लिए देशभर से 100 शिक्षाविद दौड़ में हैं। अब आगे क्या? जब सर्च कमेटी के चारों सदस्य नियुक्त हो जाएंगे, तब विवि प्रशासन आवेदन आमंत्रित करेगा। आवेदनों की छंटनी के बाद कमेटी 3 से 5 नाम बंद लिफाफे में राज्यपाल को सौंपेगी। राज्यपाल इनमें से एक नाम पर सीएम की सहमति लेंगे, जिसके बाद सुविवि को नया कुलगुरु मिलेगा। तब तक विवि की फाइलें धूल फांकती रहेंगी।


