कूड़ा कलेक्शन: पेमेंट न मिलने पर वेंडरों ने रोकीं 150 ट्रॉलियां

भास्कर न्यूज| अमृतसर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को लेकर निगम और कंपनी के बीच चल रही अंदरूनी खींचतान का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। कूड़ा उठाकर भगतांवाला डंप पहुंचाने वाले 5 वेंडरों की 150 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का करीब दो महीने का भुगतान न होने के कारण ठेकेदारों ने बुधवार से कामकाज पूरी तरह ठप्प कर दिया है। निगम के सूत्रों के मुताबिक थ्री-आर कंपनी की तरफ से 6.80 करोड़ रुपए का भुगतान करने को कहा जा रहा था। हालांकि निगम ने नवंबर तक का 3.50 करोड़ रुपए भुगतान कर दिया है। लेकिन निगम-कंपनी के इस पेमेंट के चक्कर में कूड़ा उठाने वाले ठेकेदारों का पेमेंट फंसने से एक बार फिर कूड़ा संकट के हालात बनते नजर आ रहे। बता दें कि 85 वार्डों को 2 भागों 41 और 44 वार्डों में बांटकर 3-3 साल के लिए टेंडर निकाला गया था। 44 वार्डों से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को लेकर जो टेंडर हुआ था, उसके मुताबिक डेली 274 टन कूड़ा उठाना होगा। थ्री-आर कंपनी ने पर टन रेट 1625 रुपए और 41 वार्डों के लिए डेली 281 टन कूड़ा उठान को लेकर 1600.61 रुपए मिलना है। बता दें कि कंपनी ने थ्री-आर नाम चेंज करके नया नाम एएसआर स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड कर दिया है। कंपनी ने बीवीजी पोर्टल पर भी यह नाम ऑनलाइन अपडेट किया है। यानि कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए अब एएसआर स्मार्ट सिटी की गाड़ियां जाएंगी। ^ निगम की तरफ से कंपनी को बनता भुगतान कर दिया गया है। कोई पेमेंट बकाया नहीं है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के बकाए का भुगतान कंपनी को करना होता है। निगम का इससे कोई लेना-देना नहीं है। – सुरिंदर सिंह, एडिश्नल कमिश्नर ट्रैक्ट्रर-ट्रॉली से कूड़ा उठाने वाले ठेकेदारों ने पेमेंट नहीं मिलने पर काम ठप्प कर दिया है। बातचीत हो गई है। कूड़ा उठाने का काम प्रभावित नहीं होगा। सभी ट्रॉलियां काम पर वापस लौटेंगी।- जतिंदर सिंह भाटिया, मेयर इसके पहले दूसरी कंपनियों पर भी पेमेंट समय से नहीं दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं। फिलहाल, ठेकेदारों के काम ठप्प रखने से बुधवार को सड़कों से कूड़ा नहीं उठाया गया। बता दें कि 5 जोनों के 85 वार्ड हैं। कंपनी की तरफ से अब भी दर्जनों घरों वार्डों के लाखों घरों से कूड़ा उठान का काम शुरू नहीं कराया जा सका है। 240 गाड़ियां 20 जनवरी तक लगाने का दावा कंपनी ने किया था, वह भी फेल रहा। वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए गाड़ियां नहीं पहुंचने पर अभी ट्रॉलियों का सहारा लिया जा रहा है। एक ट्रॉली वाले ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनी ने 15 दिनों में पेमेंट भुगतान का भरोसा दिलाया था। लेकिन भुगतान नहीं कर पाई। करीब 2 माह होने वाले हैं। ऐसे में कामकाज ठप्प करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। जब तक बकाया पेमेंट नहीं मिलता काम ठप्प रहेगा। कंपनी के अफसरों से कई बार कहने पर भी सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद वेंडरों ने अपनी-अपनी ट्रॉलियां खड़ी कर दी है।

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