केंद्रीय बजट 2025: टैक्स छूट और जीएसटी राहत से कारोबारियों को उम्मीद, लोगों को भी मिलेगा फायदा

भास्कर न्यूज |लुधियाना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी, और इस बार बजट से नौकरीपेशा से लेकर कारोबारियों तक कई उम्मीदें हैं। बजट में संभावित बदलावों के बीच, टैक्स राहत, ईंधन कीमतों में कमी और छोटे कारोबारियों के लिए विशेष राहत की मांग उठ रही है। इस बार के बजट में सबसे बड़ी उम्मीद इनकम टैक्स छूट सीमा में बढ़ोतरी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की ओर से इनकम टैक्स में कुछ छूट दी जा सकती है, खासकर 20 लाख रुपये तक की आय वाले वर्ग के लिए टैक्स की दरों में भी मामूली कटौती की संभावना जताई जा रही है, जिससे मध्यम वर्ग को राहत मिल सकती है। ईंधन के बढ़ते दामों के कारण आम जनता और कारोबारियों दोनों को परेशानी हो रही है। इस संदर्भ में कई अर्थशास्त्रियों और उद्योग संगठनों ने सरकार से डीजल और पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने की अपील की है। इससे ईंधन की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है, जो कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने और जनता के लिए राहत देने का एक अहम कदम हो सकता है। आर्थिक सुधार की दिशा में ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार को और कदम उठाने चाहिए। कई संगठनों ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाओं के तहत लाभ बढ़ाने की मांग की है। साथ ही, किसानों के लिए नकद सहायता में वृद्धि करने का सुझाव भी दिया गया है। यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरसिमर जीत सिंह लक्की का कहना है कि सरकार चुनावों के दौरान जो वादे करती हैं, वे सत्ता में आने के बाद पूरी नहीं होते। उन्होंने कहा कि छोटी इंडस्ट्री की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है और इसकी हालत खराब हो चुकी है। मंझले उद्योगों के लिए विशेष राहत की आवश्यकता जताई और एमएसएमई क्षेत्र के लिए टैक्स छूट की बात की। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रधान रजनीश आहूजा का कहना है कि व्यवसायों पर टैक्स का बोझ कम किया जाए, विशेषकर ऑटो पार्ट्स में लगे 28% टैक्स को कम किया जाए। इससे कारोबारियों को राहत मिलेगी और अवैध गतिविधियों पर काबू पाया जा सकेगा। विनोद थापर निटिंग क्लब के प्रधान ने टैक्स छूट का सुझाव दिया। थापर ने कहा कि सरकार को बड़ी यूनिट में निवेश की गई फैक्ट्री बिक्री इनकम पर कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत देने पर विचार करना चाहिए। इन परिवर्तनों से भारत में व्यापार करना आसान हो जाएगा।उन्होंने कहा की सरकार छोटे लधुएमएसएमई की और बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है। अशोक मक्कड़ पंजाब डायर्स एसोसिएशन के चेयरमैन ने कहा की इस समय पंजाब सरकार के खजाने खाली है ऐसे में कही फिर से इस बजट में सारा बोझ इंडस्ट्री के ऊपर ना डाल दे उन्होंने कहा की पहले ही इतने ज्यादा टैक्स लगा रखें है कही इस बार और बोझ ना डाल दे ।

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