मनरेगा आजकल खासी चर्चा में है। केंद्र सरकार ने हाल में इसका नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण’ (वीबी जी राम जी) कर दिया है। गड़बड़ी रोकने के लिए डिजिटल टूल्स व मॉनिटरिंग बढ़ाई गई है। योजना को लेकर मच रहे बवाल के बीच भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। मप्र में पिछले छह माह से इस योजना की राशि ही नहीं आई है। मनरेगा परिषद के 2000 करोड़ रु. रुके हैं, जिससे काम तो ठप हैं ही, कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। अन्य केंद्रीय योजनाओं में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का हाल सबसे बुरा है। दरअसल, केंद्र योजनाओं में पारदर्शिता लाने के मकसद से केंद्र सरकार ने एसएनए स्पर्श (समायोचित प्रणाली एकीकृत जल्द हस्तांतरण योजना ) लागू की है। इसे सबसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मप्र में ही शुरू किया गया है। 27 योजनाओं के लिए एसएनए स्पर्श पोर्टल को सिंगल नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसके बाद फंडिंग और भुगतान का पूरा सिस्टम बदल जाने से काम रुक गए हैं। केंद्र व राज्य दोनों अंश मिलाते हैं, तभी राशि रिलीज
स्पर्श से ऐसे बदली व्यवस्था पुराना सिस्टम…अस्पष्टता थी अब… रियल टाइम ट्रैकिंग न अफसर बोलने को तैयार, न मंत्री… इस बारे में अफसर बोलनेसे बच रहे हैं। मनरेगा परिषद के सीईओ अवि प्रसाद का कहना है कि जो व्यवस्था है उस हिसाब से काम कर रहे हैं। ग्रामीण सड़क योजना के सीईओ दीपक आर्य कहते हैं, नए सिस्टम से कुछ दिक्कतें तो हैं। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने कमेंट ही नहीं किया।


