केंद्र सरकार के 4 लेबर कोड मजदूरों के लिए गुलामी का दस्तावेज : एक्टू

भास्कर न्यूज|लोहरदगा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के उद्देश्य से लोहरदगा में ऐक्टू (ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस) के तत्वावधान में मोदी सरकार के चार लेबर कोड का भंडाफोड़ किया गया। कार्यक्रम में केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज किया गया। सभा को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राज्य सचिव सह अखिल भारतीय म्युनिसिपल वर्कर्स फेडरेशन, दिल्ली के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश कुमार सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर उन्हें चार लेबर कोड में तब्दील करना मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लेबर कोड मजदूरों को फिर से दादा-परदादा के जमाने की गुलामी और बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि नए लेबर कोड के माध्यम से 8 घंटे के कार्यदिवस को बढ़ाकर 12 से 18 घंटे तक करने की व्यवस्था की जा रही है, वहीं 50 से 100 से कम कर्मियों वाले संस्थानों को कानूनी संरक्षण से बाहर कर दिया गया है। इससे मजदूर पूरी तरह मालिकों की दया पर निर्भर हो जाएंगे। हड़ताल और न्यायोचित मजदूरी की मांग जैसे लोकतांत्रिक अधिकारों को भी सीमित किया जा रहा है। महेश कुमार सिंह ने सरकार पर देश को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बताकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि वास्तविकता यह है कि आज भी करोड़ों गरीब अनुदानित अनाज पर जीवनयापन कर रहे हैं। पेंशन से जुड़े हालिया फैसलों को भी मजदूर विरोधी बताया गया। अंत में ऐक्टू ने चारों लेबर कोड को अविलंब वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन्हें वापस नहीं लिया तो 12 फरवरी 2026 की राष्ट्रव्यापी हड़ताल अब तक की सबसे व्यापक आंदोलन साबित होगी।

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