केंद्र सरकार द्वारा कोयला रॉयल्टी और राजस्व मद में झारखंड के बकाए 1.36 लाख करोड़ रुपए की मांग खारिज करने के बाद बुधवार को भी राजनीति गरमाई रही। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि झारखंड की मांग जायज है। वर्तमान परिस्थिति में राज्य सरकार के सामने दो ही विकल्प है या तो संघीय व्यवस्था के तहत केंद्र से बार-बार मांग करे और जनप्रदर्शन करे या फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पर कोयला रॉयल्टी और अन्य मदों के पैसों की देनदारी है। यदि केंद्र सरकार ये पैसे नहीं देती है, तो राज्य की 3.50 करोड़ जनता के भविष्य को रोकने जैसा काम होगा। उन्होंने कहा कि वे 20 दिसंबर को केंद्रीय प्री बजट मीटिंग में भी इस विषय को उठाएंगे। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2022 में राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार को इस संबंध में पत्र लिखा था। जिसमें रॉयल्टी और बकाये की मांग की गई थी। उसमें धुले कोयले की रॉयल्टी मद में 2900 करोड़ और कॉमन कॉज जजमेंट के आधार पर 32000 करोड़ रुपए के बकाये की बात कही गई थी। इसके अलावा सरकारी जमीन के अधिग्रहण मद का एक लाख एक हजार 142 करोड़ रुपए के बकाये का भी उल्लेख था। इसके बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने भी 2024 में पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि अगर, भारत सरकार को इस दावे को नकारना होता तो वह उसी समय नकार देती। लेकिन, उस वक्त उसने चुप्पी साध ली। इसका तात्पर्य यह है कि देनदारी पर उसकी स्वीकार्यता थी। अब झारखंड को भी कड़ा रूख अपनाना होगा: संजय प्र. यादव केंद्र सरकार द्वारा कोयले की रॉयल्टी और राजस्व मद में झारखंड सरकार का बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपए की मांंग को खारिज किए जाने पर श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कहा है कि कोयले की निकासी का नुकसान यहां के लोग भुगत रहे हैं। जबकि, कोयले की आपूर्ति राज्य के बाहर हो रही है। खनन की वजह से झारखंड के कई क्षेत्रों में पर्यावरण की बड़ी समस्या है। लेकिन झारखंड को रॉयल्टी मद में मिलने वाली राशि भी नहीं मिल पा रही है। यह झारखंड आैर यहां की जनता के साथ बड़ा अन्याय है। मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि अगर केंद्र सरकार इस तरह से रॉयल्टी देने से सीधे इनकार कर रही है, तो झारखंड को भी कड़ा रूख अपनाना होगा। कहा कि वे चाहते हैं कि राज्य की गठबंधन सरकार के सभी घटक दल इस मुद्दे पर गहन मंथन कर ठोस निर्णय लें ताकि झारखंड के हक को पाया जा सके। इसके लिए अगर, झारखंड से बाहर जाने वाले खनिज रोकने की बात हो तो उसपर भी अमल किया जाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन और संघर्ष से ही झारखंड अलग राज्य का गठन हो सका है। अगर केंद्र सरकार फिर से आंदोलन नहीं देखना चाहती है तो वह झारखंड की बकाया राशि का भुगतान करे। सीएम बोले-झारखंडियों की मांग हवा-हवाई नहीं है मरांडी जी राज्य सरकार द्वारा कोयला कंपनियों से 1.36 लाख करोड़ रुपए के बकाये की मांग पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के बयान पर सीएम हेमंत सोरेन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी की है। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा है कि हम झारखंडियों की मांग हवा-हवाई नहीं है, आदरणीय बाबूलाल जी। यह हमारे हक और हमारी मेहनत का पैसा है। झारखंडी हकों का आपका यह विरोध वाकई दुखद है। जब आपको अपने संगठन की पूरी ताकत लगाकर हमारे साथ खड़ा होना था- आप विरोध में खड़े हो गए। खैर, हम अपना हक अवश्य लेंगे। क्योंकि, यह पैसा हर एक झारखंडी का है। पोस्ट के साथ हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को लिखे खुले पत्र का स्कैन भी अटैच किया है। इस पत्र में हेमंत सोरेन ने बताया था कि किन किन मदों में राशि बकाया है। इसके नहीं मिलने से क्या क्या प्रभाव पड़ रहा है। बहुत कम ऐसे मौके आए हैं जब हेमंत सोरेन ने बाबूलाल मरांडी के किसी बयान पर सीधी प्रतिक्रिया व्यक्त की हो। मालूम हो कि बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में कहा है कि राज्य सरकार को बताना चाहिए कि किस किस वर्ष का बकाया है। साथ ही बकाए का ब्रेकअप देना चाहिए।


