केड़ली गांव की घटना:3 बच्चियों की मौत नहीं हुई…सरकारी सिस्टम ने हत्या की

केड़ली गांव के सरकारी स्कूल के क्लासरूम के बाहर ही माैत का कुआं बना हुआ था। यहां पढ़ने वाले बच्चे इसी माैत के कुएं के पास आते-जाते और खेलते हैं। तीनों बच्चियों की मौत सामान्य नहीं है। बल्कि सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता, लापरवाही और लालफीताशाही ने मिलकर इन बच्चियों की हत्या की है। दो माह पहले जमीन धंसने के बाद संस्था प्रधान ने टांके की छत टूटने की सूचना देते हुए मरम्मत के लिए पीईईओ और सीबीईओं पत्र भेजा। लेकिन सरकारी सिस्टम में कागज ऐसा उलझा कि उसमें तीन बच्चियां जिंदगी की जंग हार गई। दैनिक भास्कर के पास वो पत्र मौजूद है, जिसमें संस्था प्रधान ने मरम्मत के लिए लिखा है। इस पत्र के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब अधिकारी बेशर्मी से इस पत्र को ही फर्जी करार दे रहे हैं। टांके से महज 10 कदम की दूरी पर क्लासरूम है। आखिर कैसे काेई बच्चा कब तक इससे बच सकता है। हैरानी की बात ये कि टांका भी पानी से फुल था। टांके की छत की मरम्मत के लिए बजट भी काेई लाखाें-कराेड़ाें का नहीं चाहिए था, लेकिन सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली ने तीनाें बच्चियाें प्रज्ञा, रवीना और भारती काे माैत की गाेद में सुला दिया। सीधे ताैर पर माैत के जिम्मेदार शिक्षा विभाग के ही अधिकारी हैं। स्कूल की संस्था प्रधान संताेष ने इस संबंध में पीईईओ और सीबीईओं ब्लाॅक पांचू काे 18 दिसंबर काे पत्र भी लिख दिया। पत्र में उन्हाेंने आशंका जताई थी कि स्कूल परिसर में क्लास रूम के आगे बना पानी का टांका पांच इंच तक अचानक जमीन में धंस गया है। उसकी छत भी क्षतिग्रस्त है और यह कभी भी गिर सकता है। इससे अनहाेनी की आशंका है। इसकी जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए। मृत छात्रा प्रज्ञा के​ पिता रेखाराम ने नोखा थाने में परिवाद देकर सीबीईओ पांचू, बीडीओ पांचू और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। तीन जिम्मेदार और उनके बहाने देर रात संस्था प्रधान संताेष पर विभाग ने एक बार ताे एक्शन ले लिया लेकिन संस्था प्रधान का पत्र सच है या नहीं, इसकी जांच के लिए टीम गठित नहीं हुई। संताेष बाेल रहीं हैं कि उन्हें फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हाेंने दाे महीने पहले पत्र लिख दिया था। सीबीईओ, पीईईओ के साथ ही पंचायत काे भी पत्र दिया था। बड़े अधिकारी उन्हें फंसाने के लिए झूठ बाेल रहे हैं। सीबीईओ भंवर लाल जानू का कहना है कि देवानाड़ा स्कूल की संस्था प्रधान का पत्र फर्जी है। उसने डिस्पैच नंबर फर्जी लिखे हुए हैं, मामले की जांच करवा रहे हैं। साेमवार काे उन्हाेंने माैखिक रूप से बताया था। मैंने उन्हें बता दिया कि यह काम ग्राम पंचायत का है, उन्हें बताएं। वहीं पीईईओ सूरजाराम तर्ड की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने न तो फाेन उठाया और न ही मौके पर पहुंचे। शिक्षामंत्री ने शिक्षा शासन सचिव काे साैंपी जांच : शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मंगलवार शाम साेशल मीडिया पर पाेस्ट किया कि देवानाड़ा स्कूल केड़ली में हुई दुर्घटना के जिम्मेदार लाेगाें काे बख्शा नहीं जाएगा। इसके लिए उन्हाेंने शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल काे जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इधर सियासत भी तेज- सांसद हनुमान बेनीवाल आज नाेखा पहुंचेंगे
देवानाडा, केड़ली में पानी के टांके की छत गिरने से तीन बच्चियाें की माैत पर नागाैर सांसद हनुमान बेनीवाल ने दुख जताया है। उन्हाेंने सोशल मीडिया पर सीएम भजनलाल शर्मा को पोस्ट करते हुए इस घटना से सबक लेते हुए सरकारी स्कूल में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग दाेहराई। उन्हाेंने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर काे भी इसके लिए जिम्मेदार बताया। कहा कि घटना हाेने का अंदेशा हाेने के बाद भी उसे सही नहीं करवाने की सजा तीन बालिकाओं काे मिली। ऐसे दाेषियाें पर कार्रवाई हाेनी चाहिए। वे बुधवार काे नाेखा पहुंचकर विराेध जताएंगे। संस्था प्रधान और शिक्षक निलंबित, दाे शिक्षक लगाए, नई जगह लगेगी स्कूल
प्रारंभिक शिक्षा के डीईओ रामगाेपाल शर्मा ने स्कूल में टांका टूटने से उसमें गिरी तीन बच्चियाें की माैत के मामले में प्रथम दृष्टया संस्था प्रधान संताेष और शिक्षक सुनील काे दाेषी माना है। दाेनाें काे ही निलंबित कर दिया गया है। उनकी जगह स्कूल में कार्य व्यवस्था के तहत दाे नए शिक्षक लगाने के आदेश सीबीईओ ब्लाॅक पांचू काे दिए हैं। वहीं, स्कूल काे बुधवार से दूसरी सुरक्षित जगह पर लगाने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। मामले से उच्चाधिकारियाें काे अवगत करवाया जा चुका है। प्रशासन से दो दौर की वार्ता विफल, माेर्चरी के बाहर धरना जारी माेर्चरी के बाहर ग्रामीणाें का धरना जारी है। कलेक्टर नम्रता वृष्णि और एसपी कांवेंद्र सिंह के साथ उनकी दो बार वार्ता हुई। ग्रामीणों ने दोषियों पर कठोर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की, लेकिन सहमति न बनने से वार्ता विफल रही। धरनार्थियाें ने शव का पाेस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया। धरने में नोखा विधायक सुशीला डूडी, जिला प्रमुख मोडाराम, देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, आत्माराम तर्ड, पूर्व सरपंच सवाईसिंह चरकड़ा, गोपीराम चौधरी, भोमाराम लोळ, मगनाराम केड़ली, सुभाष भाम्भू, मुरली गोदारा, लिछूराम सारण, ईश्वरराम लोळ, हनी गर्ग, आरएलपी के जिलाध्यक्ष दानाराम आदि पहुंचे। तैरना न जानने वाले युवक भी टांके में कूद गए, लेकिन बच्चियों की जान नहीं बचा पाए सुबह के करीब 10.25 बजे हाेंगे। मैं अपनी बेटी गुड्डी काे बाइक पर लेकर नाेखा जा रहा था। देवानाड़ा स्कूल के पास जैसे ही पहुंचा ताे स्कूल में पढ़ने वाले हमारे माेहल्ले के बच्चे-बच्चियां चिल्लाते हुए भागते हुए बाहर आए। उन्हाेंने मुझे देखा और राेते हुए सभी एक स्वर में बाेले – फाैजी साब, म्हारी तीन बहना टांके मांय पड़गी। मैंने तत्काल बाइक काे खड़ा किया और स्कूल के अंदर गया। स्कूल के कमरे के आगे बने पानी के टांके की दीवार अंदर गिर गई थी और पानी हिलाेरे मार रहा था। साफ दिख रहा था कि घटना कुछ पल पहले ही घटी है। इतने में स्कूल के ऑफिस में से दिव्यांग शिक्षक सुनील बाहर अाए। उनकी समझ में कुछ नहीं अाया। जैसे ही पानी के टांके की छत गिरने और उसमें तीन बच्चियाें के पड़ने की जानकारी मिली, वे मदद के लिए चिल्लाने लगे। मैंने तत्काल गांव में ट्रैक्टर-टैंकर और क्रेन वालाें काे फाेन किया। मदद के लिए युवाओं काे बुलाया। काेई रस्सी लेकर आया ताे काेई सीढ़ी। जिसके पास जाे था, वह लेकर पहुंच गया। विडंबना ऐसी थी कि वहां जितने भी लाेग पहुंचे, काेई तैरना नहीं जानता था। इसके बावजूद केड़ली के रामचंद्र जाट, गाेपीराम जाट और सरकारी शिक्षक घनश्याम जाखड़ रस्सी लेकर पानी में कूद गए। पानी गहरा हाेने के कारण वे तल तक नहीं पहुंच पाए। इस बीच अलाय निवासी क्रेन चालक हनुमान सिंह राजपूत वहां पहुंचा। बच्चियाें के अंदर गिरने की बात पता चलते ही वह सीधे टांके में कूद गया। उसे भी तैरना नहीं आता था मगर वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाया। हमने उसे रस्सी से बाहर निकाला। इस दरमियान माेटर से दाे टैंकर पानी बाहर निकाला। पानी कुछ कम हुआ ताे गांव से दाे तैराक सुखाराम जाट और कानाराम जाट अा गए। उन्होंने बच्चियाें काे बाहर निकाला। बच्चियों को निकालने में 30 मिनट लग गए। हर काेई कुछ न कुछ प्रयास करता रहा, मगर बच्चियाें की सांसें थम चुकी थी।

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