एनाम खान| गढ़वा मौसम के बदले मिजाज ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया। सोमवार को जिले का न्यूनतम तापमान गिरकर सात डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जबकि अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ठंड के साथ-साथ दिन भर आसमान में बादल छाए रहने के कारण सूर्य का दर्शन नहीं हो सका। जिससे ठिठुरन और बढ़ गई। सुबह से ही शीतलहर जैसी स्थिति बनी रही। ठंडी हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। आम दिनों की तुलना में सुबह के समय बाजारों और सड़कों पर आवाजाही काफी कम देखने को मिली। जरूरी काम से निकलने वाले लोग गर्म कपड़ों, जैकेट, टोपी और मफलर में पूरी तरह लिपटे नजर आए। अत्यधिक ठंड पड़ने के कारण खासकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। दिन भर धूप नहीं निकलने से ठंड का असर और गहरा गया था। दोपहर के समय भी ठंड का अहसास बना रहा। ठंड से बचाव के लिए शहर के चौक-चौराहों, बाजारों और मोहल्लों में लोगों ने अलाव का सहारा लिया। जगह-जगह अलाव जलते देखे गए।जहां लोग हाथ सेंकते और ठंड से राहत पाने की कोशिश करते नजर आए। गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए अलाव ही ठंड से बचने का मुख्य सहारा बना रहा। ठंड बढ़ने से दैनिक जीवन पर भी असर पड़ा है। सुबह जल्दी खुलने वाली दुकानें देर से खुलीं। वहीं शाम ढलते ही बाजारों में सन्नाटा पसर गया। ठंड के कारण लोग बेवजह घर से बाहर निकलने से बचते रहे। ग्रामीण इलाकों में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही। जहां खेतों और खुले स्थानों में काम करने वाले मजदूरों को ठंड का सामना करना पड़ा। इधर, समाजसेवी डॉ एम एन खान ने जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन से निजी विद्यालय के समय में परिवर्तन करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने कहा है कि वर्तमान समय में गढ़वा जिला में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहीं निजी विद्यालय के बच्चे सुबह छह बजे से विद्यालय जाना प्रारंभ कर देते हैं। जिससे कई बच्चों को ठंड लग जाती है। वहीं बीमार पड़ जा रहे हैं। ऐसे में निजी विद्यालय का समय भी सरकारी विद्यालय की तरह सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक होना चाहिए।


