सरगुजा जिले में ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ से लगे हसदेव अरण्य क्षेत्र में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ सरकार ने वन एवं पर्यावरण विभाग ने मंजूरी दे दी है। केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में कुल 1742 हेक्टेयर वनभूमि में कोयला खदान खोलने का रास्ता साफ हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया में लिखा है-अडाणी के नाम हुआ जंगल। केते एक्सटेंशन खदान का विरोध कर रहे टीएस सिंहदेव ने छत्तीसगढ़ सरकार के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। टीएस सिंहदेव ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने के रास्ते तलाशे जाएंगे। हसदेव अरण्य क्षेत्र का केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को आबंटित किया गया है। केते एक्सटेंशन खदान के 1742 हेक्टेयर भूमि में से मात्र 0.445 हेक्टेयर भूमि राजस्व की है, शेष 1742.155 हेक्टेयर भूमि वनभूमि है, जिसमें घने जंगल हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए वनभूमि के डायवर्सन की मंजूरी 25 नवंबर 2025 को दे दी है। इसके साथ ही कोल ब्लॉक खोलने का रास्ता साफ हो गया है। भूपेश ने कहा-अडाणी के नाम हुआ जंगल
केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए डायवर्सन की मंजूरी दिए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है। भूपेश ने लिखा है- अडाणी के नाम हुआ जंगल, छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने भारी विरोध के बावजूद केते एक्सटेंशन के लिए वन एवं पर्यावरण की मंजूरी दे दी है। मतलब कि 1700 हेक्टेयर जंगल की कटाई होगी। ऐतिहासिक महत्व वाली रामगढ़ की पहाड़ियों पर खतरा मंडराता रहेगा। टीएस बोले-दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय, गलत जानकारी दी
पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। रामगढ़ पहाड़ी को संभावित नुकसान के कारण यह ज्यादा चिंताजनक है। हम लोग देखेंगे कि इसमें कानूनी सहायता ली जा सकती है या नहीं। हाईकोर्ट जाने के विकल्प तलाशे जाएंगे। सिंहदेव ने कहा कि हमने रामगढ़ से लगे केते एक्सटेंशन को मंजूरी के खिलाफ पहल की थी। यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि पीएमओ व पर्यावरण मंत्रालय से जानकारी आने के बाद, और जब रिकार्ड स्पष्ट उपलब्ध हैं कि रामगढ़ पहाड़ में स्थित रामजी का मंदिर 10 किलोमीटर के दायरे के अंदर है। इसके बाद भी इसे मंजूरी दी गई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा-कांग्रेस ने बनाया था अध्ययन दल
कांग्रेस ने दावा किया है कि वर्तमान में संचालित PKEB खदान में विस्फोट के कारण रामगढ़ की पहाड़ी दरक रही है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा है कि वर्ष 2020 में पीकेईबी खदान से सीताबेंगरा की दूरी 11 किलोमीटर बताकर खदान में कोयला उत्खनन की मंजूरी दी गई थी। PKEB सहित केते एक्सटेंशन खदान से एएसआई द्वारा संरक्षित रामगढ़ पर्वत एवं रामजी के मंदिर की दूरी 10 किलोमीटर के अंदर है।
मामला तूल पकड़ने पर भाजपा एवं कांग्रेस ने रामगढ़ अध्ययन दल बनाया था। भाजपा के अध्ययन दल ने दावा किया था कि केते एक्सटेंशन खदान से रामगढ़ पहाड़ को कोई खतरा नहीं है। वहीं कांग्रेस अध्ययन दल ने रिपोर्ट में कहा है कि रामगढ़़ की ऐतिहासिक पहाड़ कोयला खदान के कारण खतरे में है। संबंधित खबर… रामगढ़ के अस्तित्व पर संकट…गलत NOC देकर सहमति:सिंहदेव बोले-BJP सरकार कोल-ब्लॉक को दे रही मंजूरी, भूपेश कार्यकाल में भी दी गई थी गलत रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी CM टीएस सिंहदेव ने हसदेव क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। सिंहदेव ने कहा कि कोल ब्लॉक को मंजूरी दिलाने के लिए गलत NOC तैयार की गई है। DFO अभिषेक जोगावत की गलत रिपोर्ट के आधार पर BJP सरकार नए खदान को मंजूरी देने जा रही है। सिंहदेव ने बताया कि DFO ने वन डायवर्सन के लिए दी गई सहमति में भी सीताबेंगरा तक की दूरी 11 किलोमीटर बताई है। खदान की सीमा के नजदीकी छोर के बजाय दूसरे नजदीकी छोर से यह दूरी नापी गई है। केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की सीमा से रामगढ़ पहाड़ की दूरी 8.1 किलोमीटर, जोगीमाड़ा की दूरी 9.3 किलोमीटर है। सिंहदेव ने कहा कि यह कोल ब्लॉक सिर्फ एक उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए हड़बड़ी में खोला जा रहा है। यह कोयला खदान नहीं खुलेगा तो किसी को कोई भी नुकसान नहीं होगा। लेकिन खोला गया तो रामगढ़ पहाड़ का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। हम आने वाली पीढ़ी के लिए इस विरासत को खो देंगे। यहां पढ़ें पूरी खबर…


