केन्द्रीय मंत्री ने प्रशासन को आईना दिखाया:कॉलोनी की गलियां बनाईं, मुख्य सड़कें अब भी टूटी, नतीजा…गड्ढों में चल रहे लोग

केन्द्रीय मंत्री ने प्रशासन को आईना दिखाया। राज्यपाल के सामने शहर के हालात बयां किए गए। वर्षों से लोग परेशान हैं, मगर शहर की सड़कें सुधरने का नाम नहीं ले रहीं। बीडीए ने गलियों को इतनी तादाद में बना दिया कि संभागीय आयुक्त और कलेक्टर के सामने प्रजेंटेशन में मामला जम जाता है। कागजी कार्य फिट हैं मगर शहर की प्रमुख सड़कें अब भी टूटी और बड़े-बड़े गड्ढों से भरी हुई हैं। लोग इन्हीं पर चलने के लिए विवश हैं। सड़क बनाने में ट्रैफिक लोड का ध्यान नहीं रखा गया। इससे उन सड़कों को बना दिया गया जिन पर लोड कम था। जो कम टूटी थीं और जिन पर रोज 50 हजार से अधिक लोग चलते हैं, वे अभी भी जस की तस पड़ी हैं। गुरुवार को दीनदयाल सर्किल से एसबीआई तिराहे के बीच नई बनी सड़क को भी सीवर ठीक करने के लिए खोद दिया गया। “बीडीए की एक सड़क जयपुर रोड से व्यास कॉलोनी वाली री-टेंडर में गई है। बाकी के लिए 30 नवंबर ही मियाद है। एक दिसंबर को आप देखना कि अभियंताओं पर एक्शन होता है या नहीं। 30 नवंबर तक का इंतजार करो। पीडब्ल्यूडी के साथ कुछ इश्यू हैं। उन्हें हिदायत दी है। वे दिसंबर तक पूरा करेंगे।” -विश्राम मीणा, संभागीय आयुक्त पवनपुरी शनि मंदिर से डुप्लेक्स कॉलोनी वाली रोड मानसून खत्म होने के बाद पूरे प्रशासन पर सड़कों को दुरुस्त करने का दबाव इतना था कि कलेक्टर से लेकर कमिश्नर तक बीडीए, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम को समय को लेकर पाबंद करते रहे। पाबंदी में कलेक्टर–कमिश्नर ये भूल गए कि कौन सी सड़क पहले बनाने से ज्यादा जनता को फायदा होगा। मानसून के बाद जैसे ही काम शुरू हुआ तो सबसे पहले अभियंताओं ने वो सड़क बनाई जहां ट्रैफिक लोड सीमित है — 5000 लोग ही दिनभर में गुजरते होंगे। इस सड़क को चमाचम कर दिया, लेकिन लोग शहर के भीतर आते हैं तो वही गड्ढे और वही मिट्टी दिखाई देती है। लोग सवाल भी करते कि आखिर यहां ऐसा क्या था जो सबसे पहले सड़क बन गई और दूसरी जगह ऐसा क्या है कि अभी भी धूल–मिट्टी उड़ रही है। सड़क बन गई अच्छी बात है, पर बाकी सड़कों में देरी क्यों? बात डामरीकरण की है। सीसी रोड तो सर्दी में भी बनती रह सकती है। बीडीए ने फर्नीचर रोड वाली सड़क की शुरुआत की है। एक महीने से ज्यादा इसके निर्माण में लगेगा। पीडब्ल्यूडी ने भी बिना कब्जे हटाए भुट्टों के चौराहे से कीर्ति स्तंभ वाली सड़क बनानी शुरू कर दी है। गलियां ठीक, पर मुख्य रोड पर गड्ढे बीडीए ने पूरी ताकत व्यास कॉलोनी की सड़कों को ठीक कराने में लगाई। उसका असर दिखा भी, मगर सिर्फ गलियों तक। जयपुर रोड से व्यास कॉलोनी थाना होते हुए जाने वाली सड़क पर अभी भी गड्ढे हैं। टेंडर किया था, मगर वह अब वापस री-टेंडर में गई। अब वह सर्दियों के बाद ही बनेगी। दीनदयाल सर्किल से रजिस्ट्रार ऑफिस वाली रोड यह सड़क बीडीए के लिए गले की फांस बन गई। पहले तो 800 मीटर में सीवरेज लाइन बिछाने में 7 महीने बीत गए। जैसे-तैसे सीवरेज का काम पूरा हुआ तो अब सड़क अटक गई। अधिकारी दबाव डालते, तो उस दिन यहां लेबर आ जाती। किसी अधिकारी का दौरा होता तो लेबर आ जाती, मगर बाकी दिन काम बंद। अभी भी काम बंद है। इस वक्त वेटेरनरी यूनिवर्सिटी के सामने गिट्टी डालकर समतल किया गया। छोटे पैकेज में सीसी रोड बनाई गई और रास्ता ब्लॉक है। सवाल यह है कि फिर लोगों के निकलने का रास्ता क्या बचा? वही रास्ता बचा जहां सीवरेज डाली गई थी — जहां धूल उड़ रही है, जहां गड्ढे हैं। आम जनता को दिखाने के लिए पहले वो सड़क आधी बनाकर संतुष्ट किया जा रहा है जो टूटी थी, लेकिन जहां ज्यादा गड्ढे और धूल है, वहां सड़क पर गिट्टी तक नहीं डाली गई। संभागीय आयुक्त से आमजनों का सवाल है कि आपने 30 नवंबर तक डामरीकरण करने के लिए जो पाबंदी तय की थी, अगर उस समय के भीतर डामर का काम नहीं हुआ तो क्या किसी अभियंता और ठेकेदार के खिलाफ एक्शन होगा या आपकी मियाद का विस्तार होगा?

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