केरेडारी थाना से कट कर दो सहायक थाना बने, लेकिन अपराध में नियंत्रण नहीं हो पाया

भास्कर न्यूज |केरेडारी केरेडारी थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में माइंस क्षेत्र व ट्रांसपोर्टिंग रूट में अचानक आपराधिक घटनाएं बढ़ गई थी। बढ़ते अपराध को देखते हुए एनटीपीसी ने अपने प्रभाव से केरेडारी थाना से काट कर अक्टूबर 2024 में दो सहायक थाना पगार और सीकरी ओपी का सृजन कराया, लेकिन इन दोनों सहायक थानों के बढ़ने के बावजूद अपराध पर नियंत्रण नहीं हो पाया है। अगर उक्त दोनों सहायक थाना के कार्य क्षेत्र की बात करें तो पगार ओपी के अंतर्गत केरेडारी प्रखंड के पाण्डु, चट्टीबारियातु व पचड़ा पंचायत आता है, वहीं सीकरी ओपी अंतर्गत केरेडारी प्रखंड के गर्रीकला पंचायत व बड़कागांव के सीकरी पंचायत आता है। आनन-फानन में इसी के साथ बड़कागांव में एक और सहायक थाना गोंदलपुरा का भी सृजन हुआ लेकिन अभी तक वहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लेकिन पगार व सीकरी ओपी में थाना प्रभारी, पदाधिकारी व कुछ बल जरूर मिले हैं। बिक्की ठाकुर पगार ओपी प्रभारी हैं जबकि सीकरी ओपी में सुनील कुमार सिंह को थाना प्रभारी बनाया गया है। इसके बावजूद दोनों सहायक थाना क्षेत्र में दो बड़ी घटनाएं घट गई। एक मई को देर शाम लगभग आठ बजे पगार ओपी क्षेत्र अंतर्गत बीजीआर माइंस में दो स्कानियां हाइवा अपराधियों ने जलाया व फायरिंग भी की वहीं 25 जून को दिन दहाड़े 9:30 बजे सीकरी ओपी अंतर्गत मुख्य मार्ग केरेडारी-बड़कागांव रोड़ में पतरा पुल के करीब दो सुअर ब्यवसाइयों का ऑटो रोक कर अपराधियों ने गोली मारी। बीजीआर माइंस में हुए घटना का उद्भेदन तो हो गया, गिरफ्तारी भी हो गई। लेकिन अब सुअर ब्यवसायियों के ऊपर हुए हमला का उद्भेदन करना पुलिस के लिये चुनौतीपूर्ण जरूर है। दोनों सहायक थाना की व्यवस्था जुगाड़ में है सहायक थाना पगार को खुद केरेडारी थाना क्षेत्र अंतर्गत बेंगवरी पंचायत के बसरिया गांव स्थित बीजीआर साइट कार्यालय परिसर में स्थापित किया गया है। इसके अंदर केरेडारी और चट्टीबारियातु माइंस क्षेत्र आता है जिस हिसाब से थाना में पदाधिकारी व बल चाहिए तथा इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए व्यवस्था नहीं की गई है। यहां सबसे बड़ी बात है कि जिन्हें थाना जाना होता है उसे पहले बीजीआर के मेन गेट पार होना पड़ता है दिन में तो ठीक है रात में कोई गया तो बीजीआर मेन गेट ही पार करना मुश्किल होता है। वहीं सीकरी ओपी त्रिवेणी सैनिक के वर्कर्स क्वाटर के परिसर में थोड़ी सी जगह पोटा कैबिन बिठाकर व लोहे के सीट से घेर कर दी गई है यहां भी व्यवस्था के नाम पर पगार ओपी जैसा दृश्य है। इसलिये हम तो यही कहेंगे कानून व्यवस्था सुदृढ रखने के लिये पुलिस की व्यवस्था भी सुदृढ़ रहना जरूरी है।

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