केवल मानवता ही नहीं, वैष्णवता, भगवत्ता और दिव्यता का पात्र भी बनाती है श्रीमद्भागवत कथा

भास्कर न्यूज | जालंधर रविवार को जैसे ही सूरज ढला, आसमान में लालिमा गहराती गई, शहर के पटेल चौक स्थित साईं दास स्कूल की ग्राउंड में श्रद्धालु भी जुटना शुरू हो गए थे। सभी उत्साहित थे। हर एक चेहरे पर भक्तिभाव साफ झलक रहा था। बच्चे, युवा, बड़े, बुजुर्ग, महिलाएं हर कोई श्रीमद्भगागवत कथा सुनने के लिए बेसब्र और उत्साहित नजर आए। करीब दस हजार श्रोताओं से खचाखच भरा आयोजन स्थल, आगे बैठकर कथा सुनने का आनंद उठा पाएं, इसके लिए कथा शुरू होने से पहले जिसने जहां जगह पा ली, वहां से हिला नहीं। शाम ढलती जा रही थी और सबको इंतजार था कथा वाचक आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के आगमन का। महाराज जी का नाम जुबां पर आते ही मन में श्री राधे राधे राधे, बरसाने वाले राधे… भजन गूंजने लगता है। …और आखिर वह वक्त आ ही गया जब आचार्य गोस्वामी जी ब्यास गद्दी पर बैठे और मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा शुरू की। उन्होंने कहा- ‘श्रीमद् भागवत महापुराण का प्रत्येक प्रसंग मानवता की शिक्षा देता है। भागवत कथा मानव को केवल मानवता ही नहीं सिखाती। यह वैष्णवता, भगवत्ता और दिव्यता का पात्र भी बनाती है। मनुष्य का जीवन किस दिशा में चले और उसका लक्ष्य क्या हो- इसका स्पष्ट मार्गदर्शन भागवत कथा ही देती है। आचार्य गोस्वामी ने श्री शुकदेव जी के दिव्य जीवन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शुकदेव जी महाराज जन्म लेते ही वन की ओर चल पड़े और भगवान की निरंतर आराधना में लीन होकर भागवत और भगवान दोनों प्राप्त कर लिए। उन्होंने बताया कि नैमिषारण्य में शौनकादि अठासी हजार ऋषियों ने सूत जी से ऐसी कथा की प्रार्थना की, जो मानव के हृदय में व्याप्त अंधकार को करोड़ों सूर्य समान प्रकाश से दूर कर सके। इस पर सूत जी ने कहा कि वे ऐसी भागवत कथा सुनाएंगे, जिससे संसार से निवृत्ति और परमात्मा में प्रवृत्ति उत्पन्न हो। यही मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। कथा के दौरान श्री बांके बिहारी भागवत प्रचार समिति के सदस्य यशपाल चौधरी, सुनील नैय्यर, उमेश औहरी, संदीप मलिक, संजय सहगल, हेमंत थापर, चंदन वडेरा, ब्रिज मोहन चड्ढा, राजेश, अरुण मल्होत्रा समेत अन्य मौजूद रहे।

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