कैंप लगाकर खून एकत्रित कर मानवीय जीवन बचाने में अग्रसर हैं शहर की समाज सेवी संस्थाएं

भास्कर न्यूज | जालंधर खूनदान सबसे बड़ा दान है। दान की गई खून की कुछ बूंदें किसी की जिंदगी बचाने के लिए सहायक बनती हैं। डॉक्टरों के अनुसार एक व्यक्ति साल में दो से तीन बार तक खून दान कर सकता है। मन में यह भ्रम नहीं रखना चाहिए कि शरीर से खूनदान करने से शरीर में कमजोरी आती है। मन के सभी वहम, भ्रम दूर कर जरूरत के समय खूनदान करने से पीछे नहीं हटना नहीं चाहिए। 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस है। इसी उद्देश्य को मद्देनजर रखते हुए समाजसेवी संस्थाएं इसको लोक लहर बनाने के लिए और समाज को जागरूक करने में समय-समय पर कैंप लगाकर इस सेवा में अपना योगदान दे रही हैं। संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने कहा कि जागरूकता अभियान लगातार चलाए जाने चाहिए। अक्सर सिविल अस्पताल में बच्चों को खून की कमी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि सभी लोग अपना फर्ज समझकर समय-समय पर रक्तदान करते रहें तो थैलीसीमिक बच्चों को खून की कमी की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। सुनील बिजली बोर्ड अधिकारी सुनील टंडन ने बताया कि अब तक 100 बार खूनदान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि रक्तदान बहुत बड़ा दान है। दुनिया में कोई मशीन नहीं है, जो रक्त बनाती हो। जब किसी मरीज को खून की जरूरत होती है और उसकी जिंदगी दाव पर लगी होती है तो दूसरे व्यक्ति द्वारा डोनेट किया गया खून ही उसको नया जीवन देकर उसकी जिंदगी को सुरक्षित करता है। इसलिए हर किसी को रक्तदान जरूर करना चाहिए।

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