कैंसर से जंग जीतकर मिसाल बनी महिला कॉन्स्टेबल:पुलिसकर्मी सुनीता बोलीं- ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत’

कैंसर होने पर जीवन से हारने लगी। सिर के बाल उडने पर खुद को अधूरा मानने लगी। जिंदगी से टूट गई। उस समय संगीत ने जीवन में नई उमंग भरी। बीमारी से ध्यान हटकर संगीत के सुरों पर ध्यान रहने लगा। आखिरकार कैंसर को हरा दिया। महिला दिवस पर आज हम आपको जैसलमेर की जांबाज और हिम्मत वाली पुलिसकर्मी सुनीता के बारे में बता रहे है। सुनीता का कहना है- मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। बाड़मेर जिले के बायतु भोपजी गांव की रहने वाली सुनीता चौधरी बचपन से पुलिस की वर्दी का बड़ा शौक था। पुलिस भर्ती के लिए परीक्षा दी। साल 2011 में राजस्थान पुलिस में उसका सिलेक्शन हो गया। समाज की सुरक्षा का अपना जिम्मा निभाने के साथ-साथ गीत-संगीत के माध्यम से लोकतंत्र की मजबूती, सड़क सुरक्षा और स्वच्छता अभियान में भागीदारी भी दी। सुनीता के घर में रखे इनाम उनकी कहानी बयां करते हैं। कीमोथैरेपी से उड़े बाल सुनीता चौधरी ने बताया कि पुलिस भर्ती के दो साल बाद ही कैंसर हो गया। 2013 में पेट में दर्द होने पर जोधपुर जाकर जांच करवाने पर बीमारी का पता चला। उस समय पिता और भाई ने बहुत मोटीवेट किया और कहा कि तुम तो पुलिस वाली हो तुमको कैसा डर। इसके बाद कैंसर से जंग लड़ने में जुट गई। सुनीता ने बताया कि उसके लंबे-लंबे बाल थे। मगर कैंसर के इलाज में होने वाली कीमोथैरेपी में उसके बाल उड़ गए। वह उदास रहने लगी। उसे लगता कि महिला होने के बावजूद उसके सिर के बाल नहीं है। वह अपने आप को अधूरा मानने लगी। इस दौरान परिवार और साथी पुलिसकर्मियों ने साथ दिया। संगीत के गुरु ने बदल दी जिंदगी कैंसर की जंग जीतने में सुनीता चौधरी का सबसे ज्यादा साथ संगीत ने दिया। जब वह डिप्रेशन में घिरी थी। तब उनके गुरु रजनीकांत शर्मा (बाड़मेर) ने उन्हें सलाह दी कि वह संगीत की साधना शुरू करें। उसने हारमोनियम बजाना और गाना शुरू किया। धीरे धीरे सुनीता बढ़िया गाने लगी। अब उसका ध्यान कैंसर बीमारी से हट कर संगीत के सुरों में रमने लगा। इससे उन्हें कैंसर से उबरने में भी बड़ी मदद मिली। आखिरकार वह समय आया, जब सुनीता कैंसर से पूरी तरह मुक्त हो गई। सुनीता अपने बच्चे को खिलाते हुए कहती है- जिंदगी में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। हमेशा लड़कर ही जंग जीती जाती है। मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। संगीत से किया मोटीवेट कैंसर से उबरने के दौरान सुनीता ने ठाना कि सभी को जिंदगी का महत्व सिखाएगी। उसने अपने गीतों से लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया। वीडियो एलबम बनाकर सामाजिक सरोकार से जुड़े गानों पर जोर दिया। स्वच्छ भारत अभियान पर गाना हो चाहे लोकतंत्र के उत्सव चुनाव में पारदर्शी व स्वतंत्र चुनाव व मताधिकार का प्रयोग करने के लिए लोगों को गीत-संगीत के माध्यम से जागरूक करना, कोरोना से जंग लड़ना हो या फिर सड़क सुरक्षा के तहत हेलमेट अभियान हो। सुनीता अपने गाने रिकॉर्ड करती और प्रशासन को उपलब्ध करवाती है।

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