नवजात शिशुओं के इलाज के लिए केआरएच के साथ-साथ जिला अस्पताल मुरार में भी सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) संचालित हो रहा है। एसएनसीयू में नवजात शिशुओं के उपयोग में आने वाली जीवन रक्षक दवाएं ही पूरी नहीं हैं। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2017 से 2022 तक कभी भी पूरी जीवन रक्षक दवाएं नहीं रही हैं। नियमानुसार एसएनसीयू में कम से कम 12 तरह की जीवन रक्षक दवाएं होना चाहिए, लेकिन जिला अस्पताल के एसएनसीयू में 2021-22 सिर्फ 2 तरह की ही जीवन रक्षक दवाएं थीं। 2017 से अबतक की बात की जाए तो कभी भी जीवन रक्षक दवाएं आधी भी नहीं रही हैं। आईपीएचएस के मापदंडों के अनुसार एसएनसीयू में कम से कम 12 जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। हालांकि यह सूची किसी भी एसएनसीयू में आपातकालीन स्थिति के लिए संपूर्ण सूची नहीं है। श्वसन और हृदय रोग संबंधी दवाओं की कमी पर चिंता आईपीएचएस के मापदंडों के अनुसार जिला अस्पतालों में श्वसन रोगों के लिए 16 और हृदय रोगों के लिए 26 दवाएं उपलब्ध होना चाहिए। कैग की रिपोर्ट के अनुसार जिला अस्पतालों के आईसीयू के दवा स्टॉक रजिस्टर की संवीक्षा में पता चला कि श्वसन रोग के उपचार के लिए 16 दवाओं में से 11 दवाओं की अनुपलब्धता थी। वर्ष 2017 से -22 की पूरी अवधि के दौरान हृदय संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए 26 तरह की दवाओं में से आईसीयू में दवाओं की अनुपलब्धता 7 से 23 दवाओं के मध्य थी। यही कारण है कि आईसीयू में श्वसन व हृदय संबंधी समस्याओं के कारण 18 फीसदी मरीजों की मौत पर कैग ने गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया है। मौजूदा स्थिति में आईसीयू में श्वसन एवं हृदय संबंधी बीमारियों की आधा दर्जन दवाएं उपलब्ध हैं। यही कारण है कि श्वसन एवं हृदय के मरीजों को जेएएच रैफर किया जाता है। रिपोर्ट में खुलासा: कैग की टीम ने जिला अस्पताल सहित चयनित जिला अस्पतालों के एसएनसीयू के अभिलेखों की जांच दौरान, लेखा परीक्षा में पाया कि एसएनसीयू में महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध नहीं थीं। 2017-22 के दौरान जीवन रक्षक दवाओं की 3 महीने से अधिक समय तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि जीवन रक्षक दवाएं आधी भी उपलब्ध हों। एसएनसीयू आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं से निपटने के लिए पूरी तरह से सुसज्जित नहीं हैं। मौजूदा स्थिति की बात की जाए तो एसएनसीयू में अभी भी मात्र 6 तरह की ही जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हैं।


