कॉर्पोरेट स्टाइल में काम करेंगे पंजाब के सरकारी अस्पताल:9 तरह के काउंटर खोलेगी सरकार; मरीज को डॉक्टर को दिखाने–गाड़ी तक छोड़ने में मदद मिलेगी

पंजाब के सरकारी अस्पतालों में अब कॉर्पोरेट स्टाइल वर्किंग होगी। जिसमें मरीजों की पर्ची काटने और फॉर्म भरने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और गाड़ी तक छोड़ने में मदद मिलेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार सुविधा केंद्र यानी फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित कर रही है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि यह सुविधा केंद्र प्राइवेट अस्पतालों में दी जाने वाली सेवाओं को टक्कर देंगे। 4 जिलों में प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है। अगले 6 महीने में 23 जिलों के सिविल अस्पतालों में यह सेंटर खुल जाएंगे। एक सेंटर पर 46 लाख से 76 लाख तक खर्च होंगे। इसका जिम्मा प्राइवेट एजेंसी को दिया गया है। हालांकि नोडल एजेंसी के तौर पर सेहत विभाग काम करेगा। अभी क्या है अस्पतालों की व्यवस्था
प्रदेश में अभी सरकारी अस्पतालों में पर्ची काटने के लिए एक या 2 ही काउंटर बने होते हैं। जिसमें ओपीडी और इंडोर से लेकर हर तरह की सेवाओं के लिए स्लिप बनाई जाती है। ऐसे में अक्सर वहां भीड़ रहती है। मरीजों को महज डॉक्टर को दिखाने के लिए ही पर्ची कटवाने में ही घंटों इंतजार करना पड़ता है। पंजाब सरकार की योजना क्या
इस योजना में हर सिविल अस्पताल में अलग से सुविधा केंद्र में रिसेप्शन काउंटर बनाए जाएंगे। इनमें ओपीडी स्लिप से लेकर बर्थ–डेथ रजिस्ट्रेशन, आयुष्मान समेत सरकारी स्कीमों, ऑपरेशन, मेडिकल जैसी सेवाओं के लिए अलग–अलग काउंटर होंगे। इसके अलावा लोगों के लिए रेस्ट रूम और वॉशरूम समेत दूसरी बेसिक सुविधाएं भी होंगी। इसके अलावा कुछ वॉलंटियर तैनात किए जाएंगे, जो जरूरत के हिसाब से मरीजों को डॉक्टर को दिखाने और फिर गाड़ी तक छोड़ने में भी मदद करेंगे। मरीजों की बीमारियों का रिकॉर्ड भी मेंटेन होगा
इस योजना में मरीजों की बीमारियों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। जिससे सरकार को पता चल सकेगा कि किस जिले में किस एरिया से किस बीमारी के कितने मरीज आ रहे हैं। ऐसे में उनके इलाज के लिए उसी तरह के बंदोबस्त किए जाएंगे। 842 से अधिक आम आदमी क्लीनिक चल रहे
पंजाब लोगों को घरों के पास ही इलाज मुहैया करवाने के लिए सरकार की तरफ से 842 के करीब आम आदमी क्लीनिक शुरू किए गए हैं। इनमें ग्रामीण एरिया में 530 और शहरी क्षेत्रों में 312 क्लीनिक हैं। 2 करोड़ से अधिक लोग अब तक इनमें अपना इलाज करवा चुके हैं। हालांकि, बीच में केंद्र सरकार ने NHM फंड रोक दिया था। साथ ही आरोप लगाया था कि केंद्र के फंड का दुरुपयोग करके पंजाब में आम आदमी क्लीनिक खोले गए हैं। हालांकि, अब दोनों पक्षों में सहमति बन गई है। अब स्ट्रेटजी बनी है कि केंद्र और पंजाब सरकार की 60-40 हिस्सेदारी से बने आम आदमी क्लीनिक के नाम बदले जाएंगे। जो आम आदमी क्लिनिक खुद सरकार ने बनाए या किसी व्यक्ति द्वारा दान दी गई बिल्डिंग में चल रहे हैं, उनके नाम नहीं बदलेंगे।

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