कोंडागांव के आदिवासी क्षेत्र में तीरंदाजी के द्रोणाचार्य:ITBP के हवलदार त्रिलोचन ने राष्ट्रीय मास्टर तीरंदाजी में जीता गोल्ड,छात्रों को दिला चुके हैं 318 मेडल

कोंडागांव के आईटीबीपी 41वीं बटालियन के हवलदार और तीरंदाजी कोच त्रिलोचन मोहंता ने 7वीं राष्ट्रीय मास्टर तीरंदाजी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। यह प्रतियोगिता 6 से 9 मार्च तक ओडिशा के राउरकेला में आयोजित हुई थी। उन्होंने 40-45 आयु वर्ग में भाग लिया और अपने शानदार प्रदर्शन से कई राज्यों के अनुभवी तीरंदाजों को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, ओडिशा, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड और छत्तीसगढ़ के अनुभवी मास्टर तीरंदाजों ने भाग लिया था। लेकिन त्रिलोचन मोहंता ने सभी को कड़ी टक्कर देते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को बना रहे राष्ट्रीय तीरंदाज
त्रिलोचन मोहंता पिछले 10 वर्षों से कोंडागांव की आईटीबीपी 41वीं बटालियन में तैनात है। उन्होंने नक्सल प्रभावित और दूरस्थ आदिवासी अंचलों के युवाओं को तीरंदाजी में पिछले 10 वर्षों से प्रशिक्षित कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है। खिलाड़ियों ने अब तक जीते 318 पदक उनके प्रशिक्षण से कोंडागांव के आदिवासी क्षेत्र के खिलाड़ियों ने अब तक 318 पदक जीते हैं। इन खिलाड़ियों ने न केवल जिला स्तर बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ITBP के 41वीं बटालियन के कमांडेंट नरेंद्र सिंह ने कहा कि उनके जवान खेल के साथ-साथ शिक्षा और ग्रामीण विकास में भी योगदान दे रहे हैं। उन्होंने त्रिलोचन की इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए आशा जताई कि वे अपने हुनर से और अधिक प्रतिभाओं को निखारेंगे। आईटीबीपी कमांडेंट ने दी बधाई
आईटीबीपी 41वीं बटालियन के कमांडेंट नरेंद्र सिंह ने हवलदार त्रिलोचन मोहंता की उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा, हमारे जवान न केवल खेल और शिक्षा में योगदान दे रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों की हरसंभव मदद के लिए तत्पर रहते हैं। वे समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाते हैं। त्रिलोचन मोहंता ने राष्ट्रीय मास्टर तीरंदाजी प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर हमें गौरवान्वित किया है। उनकी यह प्रतिभा आगे और भी युवाओं को प्रेरित करेगी।

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