कोटपूतली क्षेत्र में हुई मावठ (शीतकालीन वर्षा) और सर्द हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। बीते 24 घंटों में क्षेत्र में 12 एमएम बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, 27 जनवरी तक सर्दी से राहत मिलने की संभावना कम है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह मावठ किसानों के लिए लाभकारी मानी जा रही है। बारिश से खेतों में नमी बढ़ेगी, जिससे दीमक जैसे कीटों का असर कम होगा। साथ ही रबी फसलों की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। मावठ के बाद पाले का खतरा, किसानों की बढ़ी चिंता हालांकि बारिश के बाद अब कड़ाके की शीतलहर और पाले का खतरा बढ़ गया है। पाले की आशंका को लेकर किसान चिंतित हैं, क्योंकि इससे फसलों को नुकसान हो सकता है। इसी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को समय रहते सावधानी बरतने की सलाह दी है। पाले से बचाव के लिए धुआं और सिंचाई के उपाय कोटपूतली-बहरोड़ के कृषि उपनिदेशक डॉ. रामजी लाल यादव ने बताया कि पाले की आशंका होने पर रात के समय खेत की मेड़ों पर 6 से 8 स्थानों पर कचरा, खरपतवार या घास-फूस जलाकर धुआं करना चाहिए। इससे खेत का तापमान गिरने से बचेगा और पाले का असर कम होगा। उन्होंने यह भी बताया कि शाम के समय हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है, जिससे फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। ठंडी हवाओं से बचाव के लिए मेड़ों पर करें यह व्यवस्था डॉ. यादव के अनुसार शीतलहर आमतौर पर उत्तर-पश्चिम दिशा से आती है। ऐसे में खेत के उत्तर-पश्चिम किनारे की मेड़ पर कटी हुई झाड़ियां या सरसों जैसी ऊंची फसलें लगाने से पौधों को ठंडी हवा से बचाया जा सकता है। छिड़काव मिलेगी फसलों को सुरक्षा कृषि उपनिदेशक ने बताया कि पाले की स्थिति में सल्फ्यूरिक एसिड का 0.1 प्रतिशत घोल या थायोरिया 500 पीपीएम का छिड़काव करने से फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है। नर्सरी, किचन गार्डन और छोटी सब्जियों की फसलों को रात में प्लास्टिक शीट या पुआल से ढकना चाहिए और सुबह होते ही हटा देना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार पाले का सबसे अधिक असर सरसों के फूल और फलियों तथा जीरे की फसल पर पड़ता है। इन फसलों को इस मौसम में अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है, ताकि उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।


