कोटा की कॉलोनी में कई ऐसे प्लॉट खाली पड़े हैं, जिन्हें आवंटित हुए सालों हो गए। लेकिन न तो उन पर कोई निर्माण करवाया गया। न ही इन प्लॉट पर समय समय पर सफाई करवाई जाती है। मालिक दूसरी जगह रहते हैं, ये प्लॉट कभी हादसों तो कभी बीमारियों का कारण बनते हैं। ऐसे में अब केडीए सख्ती के मूड में है। ऐसे भूखंड जिन पर अभी तक निर्माण नहीं हुआ है। अब उनका आवंटन निरस्त किया जाएगा। शहर में कुन्हाड़ी से लेकर बारां रोड तक हर कॉलोनी में बड़ी संख्या में ऐसे भूखंड हैं, जो मकानों के बीच में हैं। लेकिन वे खाली पड़े हुए हैं। उन पर न तो चार दीवारी हो रही है, न ही निर्माण कार्य किया गया है। वे भूखंड कचरा घर बने हुए हैं। किसी में बरसाती पानी भरा हुआ है। इससे उनमें मच्छर पनप रहे हैं। कचरे की सफाई नहीं होने से वहां आस-पास रहनेवालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही भूखंडों में भरा पानी बीमारियों का कारण बन रहे हैं। नगर निगम व केडीए अधिकारियों के अलावा जिला कलेक्टर व संभागीय आयुक्त भी शहर में निरीक्षण व बैठकों के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि खाली भूखंडों पर निर्माण नहीं करने वालों को पहले नोटिस दिए जाएं। उसके बाद भी सुधार नहीं होने पर उनका आवंटन निरस्त किया जाए। लेकिन निगम व केडीए अधिकारी सिर्फ नोटिस देकर ही इतिश्री कर रहे हैं। इसका खामियाजा वहां रहने वाले लोगों को परेशानी के रूप में भुगतन पड़ रहा है। नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से अपने-अपने क्षेत्रों में कई बार भूखंड मालिकों को नोटिस दे चुके हैं। वहीं, कई बार तो नगर निगम के स्तर पर खाली भूखंडों के कचरे को साफ तक कराया गया है। लेकिन उसके बाद फिर से वहां कचरा जमा हो रहा है। नोटिस देने के बाद भी भूखंड मालिकों पर कोई असर नहीं हो रहा। ऐसे में अब खाली भूखंडों पर निर्माण व साफ सफाई नहीं करने पर अब उनका आवंटन निरस्त किया जाएगा। केडीए के सचिव मुकेश चौधरी के अनुसार पूर्व में ऐसे करीब एक हजार से अधिक भूखंड मालिकों को नोटिस दिए जा चुके हैं। अब ऐसे लोगों के आवंटन निरस्त करने का निर्णय बोर्ड बैठक में भी लिया जा चुका है। अब ऐसे मामलों में सख्ती करते हुए एक्शन लिया जाएगा।


