हाडौती की लघु चित्रकला, जो अपनी अनूठी शैली और बारीकियों के लिए देशभर में फेमस है, अब इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सांस्कृतिक सर्जन पखवाड़े के तहत आज लघु चित्रण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह आयोजन कला, साहित्य और सांस्कृतिक एवं पुरातत्व विभाग राजस्थान तथा राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से किया जा रहा है, जो 20 से 25 सितंबर तक चलेगा। इस कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के आगे दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। मुख्य अतिथि निखिलेश सेठी, इंटक कन्वीनर कोटा चैप्टर और विशिष्ट अतिथि हाडौती हेरिटेज प्रमोटर एएच जेदी रहे। सेठी ने कहा कि हाडौती की कला धरोहर, संस्कृति और राजा-महाराजाओं के चित्रों के जरिए अपनी विशेष पहचान रखती है। उन्होंने एआई के दौर का जिक्र किया, कहा कि तकनीक के साथ यह कला और भी आगे बढ़ सकती है। शंभू सिंह चौबदार ने सबका ध्यान खींचा राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध चित्रकार शंभू सिंह चौबदार पांच दिनों तक प्रतिभागियों को हाड़ौती चित्रकला की बारीकियों से परिचित कराएंगे। चौबदार ने मौके पर मात्र चार मिनट में हाडौती चित्र बनाकर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि इस शैली को सीखने के लिए संयम और एकाग्रता बेहद जरूरी है। एएच जैदी ने बताया कि हाडौती चित्रशैली में चित्रों की बड़ी श्रृंखला मौजूद है और युवाओं का इस कार्यशाला में आना कला के भविष्य के लिए शुभ संकेत है। निशुल्क दी जाएगी ट्रेनिंग शिविर समन्वयक डॉ. राकेश सिंह ने जानकारी दी कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। कोई भी विद्यार्थी या कला प्रेमी यहां आकर इस कला को सीख सकता है। कार्यशाला का उद्देश्य हाडौती की अमूल्य विरासत को बचाना और युवाओं को इससे जोड़ना है, ताकि नई सोच और तकनीक के साथ इस कला को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सके। इस मौके पर कई कलाकार, कलाप्रेमी, छात्र और आमजन मौजूद रहे।


