कोटा की राजनीतिक ताकत का अनुमान आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि राजस्थान संघ के प्रथम राजप्रमुख कोटा के तत्कालीन महाराव भीम सिंह द्वितीय (1909-1991) थे। राजस्थान संघ के गठन में उनकी प्रमुख भूमिका थी आैर उस जमाने में कोटा राज्य के खजाने से करीब ढाई करोड़ रुपए नकद राशि के रूप में नवगठित राज्य को दान किया था। उस वक्त ढाई करोड़ रुपए िकतने अहम थे, इसे यूं समझिए- यह राशि कोटा रियासत की कुल वार्षिक आय से लगभग दोगुना थी और राजपुताने की कई अन्य बड़ी एवं आर्थिक रूप से संपन्न रियासतों से ज्यादा थी। यही राशि थी, जिससे नवगठित राज्य को आर्थिक संबल तथा मजबूती मिली। करीब दो साल तक शासन की व्यवस्थाओं को चलाने में मदद मिली। वर्ष 1948 में 25 मार्च को अपने राज्य को राजस्थान संघ में विलय करने वाले शासकों में वे प्रथम थे। भास्कर विशेष सरदार वल्लभ भाई पटेल के करीबी आैर भारत के राजनीतिक एकीकरण में महती भूमिका निभाने वाले वीपी मेनन ने तत्कालीन महाराव भीम सिंह द्वितीय के बारे में अपनी पुस्तक “द स्टोरी ऑफ द इंटीग्रेशन ऑफ द इंडियन स्टेट्स’ में विस्तार से लिखा है। पुस्तक में उल्लेख है-”1946 की शुरुआत में कैबिनेट मिशन योजना की घोषणा के बाद कोटा के महाराव ने संघ के उद्देश्य से कुछ पड़ोसी राज्यों बांसवाड़ा, टोंक, बूंदी, डूंगरपुर, किशनगढ़, प्रतापगढ़, शाहपुरा, लावा, कुशलगढ़ और झालावाड़ के मंत्रियों का एक सम्मेलन बुलाया था आैर इस योजना का समर्थन किया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि कोटा में कम से कम एक विधायी सत्र प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए। राज्य बल इकाइयां वहां होनी चाहिए, जिनमें वन विद्यालय, पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय और फ्लाइंग स्कूल के साथ ही साथ कोई भी अन्य संस्थान जो सुविधाजनक रूप से कोटा में हो सकता था।’ अस्पताल के लिए धन व जमीन दी, कई बड़े सरकारी कार्यालय व आवास उन्हीं की दी जमीन पर : तत्कालीन महाराव भीम सिंह द्वितीय की दूरदृष्टि और सूझबूझ ही थी कि उन्होंने तभी कोटा में कई सरकारी कार्यालय व अधिकारियों के आवास बना दिए थे। उन्होंने राज्य पहले बड़े अस्पताल के लिए धन और जमीन दान की और शासन के सुचारू रूप से संचालन के लिए कई भवनों एवं जमीनों का भी दान किया था। इनमें विशेष रूप से जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर, सर्किट हाउस परिसर, डाक बंगला परिसर, संभागीय आयुक्त आवास, जिला न्यायाधीश आवास, कलेक्टर आवास आदि प्रमुख हैं। साथ ही हाड़ौती क्षेत्र में एकमात्र हवाई अड्डा भी कोटा में स्थापित किया। उन्हें 1956 में भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र में वैकल्पिक प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया था। मेनन ने अपनी पुस्तक में किया उल्लेख, कोटा में बुलाया था सम्मेलन कोटा में 23 दिसंबर से तीन दिवसीय “कोटा महोत्सव’ होने जा रहा है। भास्कर ने प्रयास किया है कि इस महोत्सव के दौरान उस कोटा से आमजन को रूबरू कराया जाए, जिसने इतिहास में हमें बार-बार गर्व करने का अवसर दिया है। चंबल किनारे होने से एक पूरी सभ्यता को समेटे यह शहर पुरासंपदा से सरसब्ज तो है ही, सांस्कृतिक आैर राजनीतिक रूप से भी समृद्ध रहा है। कोटा महोत्सव के तहत “हमारा इतिहास, हमारा गौरव’ विशेष शृंखला की पहली कड़ी में आप वह कहानी पढ़िए, जो राजस्थान के गठन में कोटा का महत्व बताएगी।


