कोयलांचल में रेलवे की कनेक्टिविटी से क्षेत्र में बढ़ेगा व्यापार
भारतीय रेल का व्यापार और उद्योग में अहम् योगदान
अनूपपुर। रेल नेटवर्क देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है और रेलवे के द्वारा चलाई जाने वाली ट्रेनों को लाइफ लाइन कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि आम आदमी हो या फिर खास कमोबेश हर व्यक्ति ट्रेनो से अपनी छोटी और बड़ी से बड़ी यात्राएं करता है इतना ही नहीं भारतीय रेल क्षेत्र में चल रहे व्यापार और उद्योग में अपना अहम् योगदान देती है। माल परिवहन हो या फिर लोगों का आवागमन उक्त दोनों ही क्षेत्रों में रेलवे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है इस बात से भला कौन और कैसे इंकार कर सकता है माना जाता है कि जिस रेल खंड में ट्रोनो की जितनी ज्यादा कनेक्टिविटी होगी उस क्षेत्र उतना ही अच्छा व्यापार होगा। इसके ठीक पैरलल ट्रेनों की बेहतर कनेक्टिविटी होने से लोगों की यात्राएं भी सुगम और आसान होती है ऐसे में ट्रेनों का सीधा फायदा आम नागरिक समाज को मिलता है अगर ये कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी कि क्षेत्र के विकास का दारोमदार भी बहुत हद तक ट्रेनों पर ही टिका होता है ऐसे में रेलवे द्वारा संचालित ट्रेनों की मांग लोगों द्वारा की जाती है जिससे एक ओर लोगों की यात्राएं आसान हो तो दूसरी ओर व्यापार में बढ़ोतरी होती चली जाती है गौरतलब कि बड़े शहरों से सीधी ट्रेन सुविधाएं होने से लोगों को आसानी से एक ओर जहां अच्छी स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध हो पाती है वहीं दूसरी ओर उक्त क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर व्यापार का ग्राफ भी बढ़ता है।
अब आप लौटिए अंबिकापुर अनूपपुर चिरमिरी अनूपपुर रेल खंड पर और उक्त रेल खंड के बीच खड़े होकर नजर डालिए तीन तस्वीरें एक साथ आपको दिखाई पड़ेगी उक्त रेल खंड एक कोयलांचल रेल खंड है रेल पटरियों पर दिन भर रेलवे की रैंकों का आवागमन और जिसके भीतर का अनूठा सच तो यही है कि रेलवे को कोयला परिवहन से मोटा मुनाफा होता है। रेल यात्रियों की सर्वसुविधायुक्त रेल यात्रा बनाए जाने के मद्देनजर केंद्र की मौजूदा सत्ता द्वारा चलाई जा रही अमृत भारत योजना अंतर्गत रेलवे स्टेशनों में चल रहे निर्माण कार्य जो वाकई स्वागत योग्य है जाहिर है कि अमृत भारत योजना अंतर्गत अंबिकापुर अनूपपुर रेल खंड पर अनूपपुर बिजुरी और अंबिकापुर रेलवे स्टेशनों पर द्रुत गति से विभिन्न निर्माण कार्यों को पूरा करने का काम किया जा रहा है जिससे माना जा रहा है कि आगामी कुछ ही महीनों के भीतर उक्त स्टेशन सर्वसुविधायुक्त होकर चकाचौंध में समा जाएंगे। लेकिन तस्वीर अपने आप में कई सवालों को जन्म देती है इस बात का जिक्र इसलिए क्योंकि अंबिकापुर अनूपपुर चिरमिरी अनूपपुर रेल खंड में बहुप्रतीक्षित ट्रेनों के मांगों के पन्नों को पलटिए तो दिखाई देती तस्वीर ये बताती है कि उक्त रेल खंड के नागरिक समाज द्वारा पायदान दर पायदान मांग किए जाने के बाद भी अब तक ट्रेनों की मांग पूरी हो नहीं पाई सर्वविदित है कि सासंद हिमाद्रि सिंह के अथक प्रयासों से नागपुर ट्रेन का परिचालन बा मुश्किल शुरू भी हुआ उसे भी शहडोल से ही चलाया जा रहा है। जिससे अनूपपुर-अंबिकापुर-अनूपपुर-चिरमिरी रेल खंड के रहवासियों की नागपुर से सीधी कनेक्टिविटी हो नहीं पाई इस के ठीक समानांतर उक्त रेल खंड पर अंबिकापुर निजामुद्दीन ट्रेन चलाई गई वह भी बीना के रास्ते उक्त ट्रेन को चलाया जा रहा है जबकि उक्त ट्रेन को अगर जनता की मांग को ध्यान में रखकर चलाया जाता तो प्रयागराज हो कर चलाया जाता क्या वर्तमान समय पर जनता की मांग और जन सुविधाओं के मद्देनजर ट्रेनों को नहीं चलाया जाता ?क्योंकि जनता की मांग तो अंबिकापुर दिल्ली व्हाया प्रयागराज होकर नयी ट्रेन चलाए जाने की थी याद कीजिए अंबिकापुर नागपुर ट्रेन की मांग अंबिकापुर दिल्ली व्हाया प्रयागराज की मांग अब तक पूरी नहीं की गई और उक्त रेल खंड के बीच कोरोना काल के बाद एक ऐसी तस्वीर उभरकर आई जिसने पटरी पर सप्ताह भर दौड़ने वाली ट्रेन रीवा चिरमिरी को साप्ताहिक ट्रेन बना कर चलाया जाने लगा जिसके नीयमित परिचालन की मांग की जा रही है लेकिन ढाक के तीन पात ऐसा नहीं कि लोगों के मांग के मद्देनजर शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद हिमाद्रि उक्त मांगों के मद्देनजर लुटियंस की दिल्ली के सत्ता के गलियारे में अपनी आवाज बुलंद नहीं कर रही है ज्ञातव्य है कि सांसद हिमाद्रि सिंह ने चुनावी जीत हासिल करने के बाद ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर उक्त मांगों को पूरा करने की मांग की थी संसद के भीतर रेल मंत्रालय का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया था लेकिन बाह रे सिस्टम की मोटी लकीर इस लकीर को क्या कहा जाए! यहां पर एक बड़ा सवाल हमारे जहन में उठता है आपके जहन में उक्त सवाल उठना चाहिए क्या वर्तमान समय पर सत्ता दल के सांसद की भी सुनवाई नहीं होती ? स्मरणीय है सांसद भी भाजपा की है और सत्ता भी भाजपा की है ऐसे में सांसद की कोशिशों के बाद भी ट्रेनों की मांग अगर पूरी न तो क्या ये कहना अतिशयोक्ति होगी कि वाकई वक्त कठिन है? बहरहाल उक्त रेल खंड में ट्रेनों की मांग कब पूरी होगी नहीं मालूम ट्रेनों के मांगों के मद्देनजर रेलवे प्रशासन को कौन सी तकनीकी दिक्कते आड़े आ रही है ये भी नहीं मालूम लेकिन इतना तो तय है कि उक्त रेल खंड की जनता आसा भरी नजरों से रेल मंत्रालय और शहडोल सांसद हिमाद्रि सिंह की ओर देख रही है।


