रहनुमा बनकर एसईसीएल कर्मी का शोषण करना सरल

रहनुमा बनकर एसईसीएल कर्मी का शोषण करना सरल-विक्रमा सिंह
अनुपपुर।
कोयलांचल क्षेत्र में मजदूरों के बीच काम करने वाले श्रमिक नेता विक्रमा सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट पर कोयलांचल अनुभव हेड लाइन से जो बातें लिखी है उससे साफ झलकता हैं कि कॉलरी से रिटायर व्यक्ति ट्रेड यूनियन में अपना जगह बना कर मजदूर सेवा का दुकान चलाने लगता हैं। विक्रमा सिंह मध्य प्रदेश इंटक के प्रदेश सचिव पद पर है। उनके फेसबुक पोस्ट पर गौर करे तो लिखा है कि कोल इंडिया में  सेवानिवृत व्यक्ति या बाहरी व्यक्ति केंद्रीय स्तर पर ट्रेड यूनियन में पदाधिकारी बनता है तो समझ में आता है कि मजदूरों के बीच रह कर कुछ विशेष योग्यता हासिल कर लिया होगा इसलिए उसका यूनियन में पदाधिकारी होना उचित हो सकता है लेकिन जो लोग क्षेत्रीय एवं शाखा स्तर पर बाहरी या सेवानिवृत व्यक्ति को यूनियन में पदाधिकारी बनाये जाने का पक्षधर है या बने हुए हैं उनके समर्थक या तो कमजोर है, या डरे हुए लोग होते हैं या फिर उन्हें गुट बनाने में स्थाई एम्पलाई नही मिल रहे होते तब ऐसे लोग उनका सहारा लेने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं।
ऐसा होने से कोल इंडिया के मजदूरों का लाभ कही नही होता और यही से सेवा के नाम पर मजदूरों से उनका लुट खसोट चालू होता है, छोटे नेता (मÛ लोग) मजदूरों से कुछ नगद या दारूध् मिटध्किरानाध्साग सब्जी आदि प्रकार की सेवाएं प्राप्त कर लेते हैं स इस लिए वह ट्रेड यूनियन में शामिल होने की समझ लिए दौड़ लगाए दिख जाते हैं या फिर अपना कदम जमा लिए हैं । यदि कदम जमा लिए हैं तो अपने सेवारत साथी को प्रबंधन के साथ मिलकर बिचौलिया तैयार कर लिया फिर क्या इनका अपना धंधा शुरू यदि 25-35 साल आप ट्रेड यूनियन में अच्छा काम किए होंगे तो आप का जनाधार होगा, ऐसे व्यक्ति को सेवानिवृत होने पर राजनीति में अच्छा स्थान स्वतः मिल जाता हैं। फिर आप वही से पूरे क्षेत्र को अपनी सेवाएं क्यों नहीं देने लगते स कोयलांचल क्षेत्र में ऐसी हालात देखकर मन में ऐसा विचार बार बार दिमाग उठता है। असहाय क्षेत्रीय ट्रेड यूनियन नेता सेवानिवृत्त नेताओं को ढोता है और बिचौलियों की  दुकानदारी चलती रहती हैं।
रिटायर नेताओं का प्रसंशा
ऐसा भी नही है कि सारे सेवानिवृत मजदूर नेता  शोषण करते हैं जिनमें काबिलियत होती हैं, उनको सारे कार्यकर्ता एक स्वर में उदघोष भी कर देते है कि संगठन में इनकी जरूरत है स और केंदीय में पदाधिकारी  बन जाते हैं। मैं अपने हसदेव क्षेत्र में भी स्वयं अनुभव किया कि ऐसे कुछ श्रमिक नेता हुए जिन्हें श्रम संगठन को केन्द्रीय स्तर पर रखना चाहिए और कुछ आज भी मजदूरों के बीच हैं जिनमे अख्तर जावेद उस्मानी जी में मजदूर नेता के रूप में सभी कामगार तारीफ करता है। कुछ हमारे अग्रज मजदूर नेता अग्रणी, अनुभवी सेवानिवृत्त होने के बाद अपने आगे की व्यवस्था के लिए गृहग्राम चले गए जिसमें एनपी मिश्रा जी (इनमोसा), आरएन पांडेय (इंटक) जैसे होते तो श्रम क्षेत्र में इनका लाभ मजदूर साथियों को अवश्य प्राप्त होता। साथियों मेरा व्यक्तिगत विचार है जो मैं कोयलांचल क्षेत्र से प्राप्त किया शब्दों में उतार दिया। इसे अपने से जोड़ कर न देखे। विक्रमा सिंह ने बड़ी ही समझदारी से कोयलांचल क्षेत्र के गंभीर विषय को कामगारों के बीच लाए हैं। एसईसीएल में सेवारत कामगार जो रिटायर नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं साथी को अपने ऊपर लगे बिचैलिया के ठपा से बाहर निकलना होगा।

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