कोरोना काल में राजबाड़ा धरना मामले में सभी आरोपियों बरी:जीतू पटवारी समेत कांग्रेस नेताओं ने किया था प्रदर्शन, पुलिस नहीं बता पाई कितने लोग थे

जिला कोर्ट ने कोरोना काल के दौरान राजबाड़ा चौक पर बिना अनुमति धरना प्रदर्शन करने के मामले में तत्कालीन विधायक जीतू पटवारी, संजय शुक्ला, विशाल पटेल और विनय बाकलीवाल को दोषमुक्त कर दिया। मामले में फरियादी थाना प्रभारी ने अपने थाने के पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया था। पूरे मामले में एक भी स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। थाना प्रभारी सहित किसी भी पुलिसकर्मी को यह जानकारी नहीं थी कि धरना प्रदर्शन में कितने लोग शामिल थे। घटना की कोई वीडियो रिकॉर्डिंग भी कोर्ट में पेश नहीं की गई। साक्ष्यों के अभाव और दोष सिद्ध न होने के कारण कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। एमपी एलएलए कोर्ट इंदौर के न्यायाधीश देव कुमार ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। कोरोना काल के दौरान 13 जून 2020 को विधायक पटवारी, शुक्ला, पटेल और बाकलीवाल ने राजवाड़ा पर देवी अहिल्या प्रतिमा के सामने जमीन पर बैठकर धरना प्रदर्शन किया था। इस पर थाना सराफा ने कोरोना संक्रमण काल में कलेक्टर के प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में धारा 188, 34 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। पूरे मामले में किसी स्वतंत्र गवाह का रहा अभाव प्रकरण में तत्कालीन थाना प्रभारी अमृता सोलंकी फरियादी थीं और एफआईआर भी उन्हीं द्वारा दर्ज की गई थी। विवेचना अधिकारी भी वे स्वयं थीं। फरियादी थाना प्रभारी ने अपने मातहत पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया। पूरे मामले में किसी स्वतंत्र गवाह या वीडियो रिकॉर्डिंग का अभाव था। थाना प्रभारी सहित किसी गवाह को यह जानकारी नहीं थी कि धरना प्रदर्शन क्यों किया गया और क्या मांगें थीं। सोमवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पटवारी सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया। प्रकरण में आरोपियों की ओर से पैरवी एडवोकेट सौरभ मिश्रा और एडवोकेट जय हार्डिया ने की।

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