जयपुर | हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि ईसाई विवाह अधिनियम के तहत हुई शादियों के मामले में जारी किए विवाह प्रमाण पत्रों को सिविल रजिस्टर में दर्ज करने से मना नहीं कर सकते। यह वैधानिक दायित्व है व इसे किसी अधिकारी के विवेकाधीन निर्णय के अधीन नहीं रख सकते। अदालत ने कहा कि विवाह केवल निजी संबंध नहीं, बल्कि वैधानिक स्थिति है। इससे उत्तराधिकार, सामाजिक सुरक्षा व भरण पोषण सहित अन्य परिणाम पैदा होते हैं। जस्टिस पीएस भाटी व जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश सिरो-मालाबार रोमन कैथोलिक चर्च के प्रीस्ट इंचार्ज फादर पॉल पी की जनहित याचिका पर दिया।


