प्रखंड में पिछले दो दिनों से कोहरा और शीतलहरी का प्रकोप जारी है। जिससे फसल प्रभावित होने की आशंका से किसान चिंतित हैं। खासकर टमाटर, मटर, आलू, प्याज, लहसुन व अन्य फसलें अधिक प्रभावित होने लगी है। जिससे फसलों को पाला मारने के साथ झुलसा रोग होने की आशंका है। जिससे किसान खासे चिंतित हैं । ऐसे में फसलों को बचाने के लिए किसान यूरिया खाद और दवाइयों का छिड़काव भी कर रहे हैं। परंतु अत्यंत ठंड व कोहरे के कारण आलू सहित अन्य फसल को बचाव करना मुश्किल हो रहा है । कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर मधुकर ने बताया कि आलू की खेती अगेती या पिछेती यह झुलसा रोग के प्रति संवेदनशील होता है। आलू की फसल को सर्वाधिक नुकसान भी इसी रोग से पहुंचता है । आमतौर पर यह रोग अधिक ठंड व दिसंबर के महीने में फसल में लगता है। लेकिन इस बार पिछले दो दिनों से कोहरे के साथ अधिक ठंड होने से किसानों को चिंता सता रही है और मौसम में बदलाव के कारण इस रोग का खतरा अभी से शुरू हो गया है। कहीं-कहीं अगेती फसलों में भी इसके लक्षण भी मिले हैं। ऐसे में तत्काल प्रबंधन कर किसान रोग से होने वाली क्षति को रोक सकते हैं। नहीं तो यह रोग उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।


