क्रिकेट का शौक बना कमजोरी, इनामी तस्कर गिरफ्तार:पिता जेल में, बेटा बना तस्कर; MP में है वांछित आरोपी

राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय इनामी तस्कर आवेश उर्फ अरमान आखिरकार पुलिस के हाथ लग गया। आरोपी को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की टीम ने मध्यप्रदेश पुलिस के रिक्वेस्ट पर प्रतापगढ़ जिले के कोटड़ी गांव से गिरफ्तार किया। खास बात यह रही कि आरोपी को पकड़ने में किसी फिल्मी पीछा या मुठभेड़ की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि उसकी क्रिकेट के प्रति रुचि ही उसकी कमजोरी बन गई। जानकारी के अनुसार आवेश आसपास होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंट देखने और स्थानीय टीम को मार्गदर्शन देने के बहाने गांव में आया था, इसी दौरान पुलिस ने उसे धर दबोचा। आरोपी लंबे समय से राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच तस्करी का नेटवर्क चला रहा था और पुलिस की पकड़ से बचता फिर रहा था। राजस्थान और मध्यप्रदेश में फैला था तस्करी का नेटवर्क एटीएस एवं एएनटीएफ राजस्थान के महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया कि एएनटीएफ की टीमें न केवल राजस्थान में मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई कर रही हैं, बल्कि दूसरे राज्यों के मामलों में वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी में भी सहयोग कर रही हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले की पुलिस ने इनामी आरोपी आवेश उर्फ अरमान को पकड़ने के लिए हेल्प मांगी थी। जांच में सामने आया कि आरोपी राजस्थान में रहकर मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों की सप्लाई करता था। वह राजस्थान को अपना सुरक्षित ठिकाना मानता था, जबकि असली धंधा मध्यप्रदेश में चलाता था। इस वजह से दोनों राज्यों की पुलिस के लिए उसे पकड़ना चुनौती बना हुआ था। कम उम्र में अपराध की दुनिया में कदम गिरफ्तार आरोपी आवेश उर्फ अरमान प्रतापगढ़ जिले के कोटड़ी गांव का रहने वाला है और उसकी उम्र सिर्फ 20 साल है। उसने कक्षा 10वीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन इसके बाद पढ़ाई छोड़ दी। पुलिस के अनुसार उसके पिता बादशाह खां करीब एक साल पहले एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में जेल चले गए थे, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। इसी दौरान आवेश गलत संगत में पड़ गया और मध्यप्रदेश के तस्करों के संपर्क में आ गया। कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लालच में उसने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी शुरू कर दी और धीरे-धीरे यह उसका मुख्य काम बन गया। एमडी और डोडा पोस्त की तस्करी में सक्रिय भूमिका पुलिस जांच में सामने आया कि आवेश शुरुआत में छोटे स्तर पर काम कर रहा था, लेकिन मुनाफा ज्यादा होने के कारण उसने एमडी और डोडा पोस्त की तस्करी में हाथ डाल दिया। वह राजस्थान से मादक पदार्थ लेकर मध्यप्रदेश तक सप्लाई करता था। लंबे समय तक वह पुलिस की नजर से बचता रहा, लेकिन साल 2025 में बड़वानी जिले के एक मामले में उसका नाम सामने आने के बाद वह वांछित घोषित हो गया। इसके बाद भी उसने अपना काम पूरी तरह बंद नहीं किया और चोरी-छिपे तस्करी जारी रखी। पुलिस रिकॉर्ड में नाम आने से बढ़ी मुश्किलें साल 2025 में ही आरोपी ने अपने ही गांव के परवेज नाम के व्यक्ति को एमडी सप्लाई की थी, लेकिन वह मध्यप्रदेश के औद्योगिक नगर जावरा थाने की पुलिस के हाथ लग गया। इस घटना के बाद आवेश एक बार फिर पुलिस के रडार पर आ गया। इसके बावजूद वह अपनी चालाकी से बच निकलता रहा। जब भी मध्यप्रदेश की पुलिस उसकी तलाश में राजस्थान आती, वह पहले ही जगह बदल देता। वहीं राजस्थान पुलिस को भी उसके ठिकानों की पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही थी, जिससे आरोपी लंबे समय तक फरार रहने में सफल रहा। सूचना के आधार पर बनाई गई रणनीति एएनटीएफ टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए सूचनाएं जुटानी शुरू कीं। इसी दौरान पता चला कि आवेश को क्रिकेट का काफी शौक है और वह आसपास होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंटों में दर्शक के रूप में जरूर पहुंचता है। यह भी जानकारी मिली कि वह स्थानीय युवाओं को क्रिकेट की कोचिंग देने में रुचि रखता है। जब कोटड़ी गांव और आसपास के क्षेत्रों में एक बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट की सूचना मिली, तो पुलिस को अंदेशा हुआ कि आरोपी वहां जरूर आएगा। इसी आधार पर टीम ने रणनीति बनाई और निगरानी शुरू की। कोटड़ी गांव से हुई गिरफ्तारी अनुमान सही साबित हुआ और आवेश कोटड़ी गांव में क्रिकेट से जुड़े युवाओं के बीच नजर आया। वह दिन-रात गांव के पास रहकर टीम को मार्गदर्शन दे रहा था और खुद को सामान्य युवक की तरह पेश कर रहा था। इसी दौरान एएनटीएफ की टीम ने उसे पहचान लिया और मौके पर ही पकड़ लिया। इस कार्रवाई में एएनटीएफ चौकी प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ की टीमों की भूमिका रही। आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों को सूचित किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ में उसके नेटवर्क और अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि वह किन-किन लोगों से उसका संपर्क था।

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