ग्लोबल क्रिप्टो मार्केट की वैल्यू 3 ट्रिलियन डॉलर से नीचे आ गई है। कॉइनमार्केटकैप के अनुसार अक्टूबर में ये 4.28 ट्रिलियन डॉलर थी, जो अब घटकर 2.95 ट्रिलियन डॉलर पर आ गई है। रुपए में वैल्यू करीब 379 लाख करोड़ से करीब 100 लाख करोड़ घटकर 261 लाख करोड़ हो गई है। यानी, करीब एक महीने में वैल्यू में 30% से ज्यादा की गिरावट आई है। क्रिप्टो मार्केट में बिटकॉइन की हिस्सेदारी करीब 58% है। वहीं इथेरियम की 12% और अन्य की 30% है। बिटकॉइन एक महीने में घटकर 76 लाख रुपए पर आ गया है। ये 1.10 करोड़ रुपए के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से करीब 34 लाख रुपए घट चुका है। बिटकॉइन ने 7 अक्टूबर को ये स्तर छुआ था। यानी, करीब एक महीने में बिटकॉइन 30% से ज्यादा गिर चुका है।बिटकॉइन के अलावा इथेरियम, सोलाना जैसी क्रिप्टो में भी गिरावट आई है। इथेरियम 4.15 लाख रुपए से घटकर 2.48 लाख रुपए पर आ गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार इस गिरावट के 2 कारण हैं- उदाहरण से समझिए लीवरेजिंग… मान लीजिए आपके पास 10 हजार रुपए हैं। अगर आप 10x लिवरेज लेते है तो इसका मतलब है कि एक्सचेंज आपको 1 लाख रुपए का बिटकॉइन खरीदने देता है। यानी, अब बिटकॉइन बढ़ेगा तो फायदा 1 लाख रुपए पर मिलेगा और गिरेगा तो घाटा भी।
अब बिटकॉइन से जुड़ी जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: बिटकॉइन क्या है और कैसे काम करता है? जवाब: बिटकॉइन को डिजिटल दुनिया का “सोना” कहा जाता है। यह एक ऐसी डिजिटल करेंसी है जो बिना किसी बैंक या सरकार के नियंत्रण के काम करती है। यानी, ये डीसेंट्रलाइज है। किसी एक अथॉरिटी का इस पर कंट्रोल नहीं है। बिटकॉइन कोई फिजिकल कॉइन या नोट नहीं है, बल्कि एक डिजिटल कोड है जो आपके डिजिटल वॉलेट में रहता है। जैसे आप व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते हैं, उसी तरह बिटकॉइन को आप इंटरनेट के जरिए दुनिया में कहीं भी भेज सकते हैं। इनकी संख्या भी सीमित है। बिटकॉइन ब्लॉकचेन तकनीक पर काम करता है सवाल 2: ब्लॉकचेन कैसे काम करती है? जवाब: ब्लॉकचेन को ब्लॉकों की एक श्रृंखला के रूप में सोचें। प्रत्येक ब्लॉक कॉपी का एक पेज है जिसमें लेनदेन की सूची होती है (जैसे, आदित्य ने विक्रम को 100 रुपए भेजे)। जब ब्लॉक भर जाता है, तो उसे लॉक कर दिया जाता है और पिछले ब्लॉक से जोड़ दिया जाता है। नोड्स नामक कंप्यूटर इस जानकारी को जांचते और स्टोर करते हैं, यह सुनिश्चित करके कि यह सही और सुरक्षित है। ब्लॉकचेन बहुत सुरक्षित भी है, क्योंकि यह डेटा को बचाने के लिए गणित और कोड का उपयोग करता है। चूंकि कई कंप्यूटर ब्लॉकचेन की कॉपी रखते हैं, इसे हैक करना मुश्किल है। सवाल 3: बिटकॉइन को डिजिटल सोना क्यों कहते हैं? जवाब: बिटकॉइन की एक खास बात यह है कि इसकी कुल संख्या 21 मिलियन है। इससे ज्यादा बिटकॉइन कभी नहीं बनेंगे। यह नियम इसकी तकनीक में पहले से ही लिखा हुआ है। अगर बिटकॉइन अनलिमिटेड बनते, तो जैसे ज्यादा नोट छापने से सामान की कीमतें बढ़ जाती हैं, वैसे ही बिटकॉइन की कीमत कम हो सकती थी। इस सीमित आपूर्ति की वजह से इसे “डिजिटल सोना” कहा जाता है, क्योंकि यह दुर्लभ और कीमती है। सवाल 4: बिटकॉइन और फिएट करेंसी में क्या फर्क है? जवाब: फिएट करेंसी वह नोट या सिक्का है, जिसे सरकार छापती है, जैसे भारत में 500 रुपए का नोट। अगर सरकार कह दे कि यह नोट अब मान्य नहीं है, जैसा कि 2016 में नोटबंदी के दौरान हुआ, तो उसकी कीमत शून्य हो सकती है। लेकिन, बिटकॉइन सोने की तरह है जिसकी अपनी आंतरिक कीमत है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह भी सोने की तरह दुर्लभ है और इसे सरकार नियंत्रित नहीं कर सकती। पहले लोग अनाज या सोना देकर चीजें खरीदते थे। फिर सरकार ने कागजी नोट छापे। पहले, करेंसी की कीमत सोने या चांदी जैसे भौतिक संसाधनों पर आधारित होती थी। जितना सोना आपके पास है, उतनी ही करेंसी आप छाप सकते थे। फिर भौतिक आधार की शर्त को हटा दिया गया। यानी, सरकार जितने चाहे उतने नोट छाप सकती है। लेकिन इससे महंगाई बढ़ती है। बिटकॉइन इस पूरी व्यवस्था को बदल देता है। सवाल 5: क्या बिटकॉइन खरीदना रिस्की है? जवाब: हां, बिटकॉइन रिस्की हो सकता है। इसकी कीमत बहुत ऊपर-नीचे होती है। वॉलेट का पासवर्ड भूलने से भी बिटकॉइन खो सकता है। साथ ही, कुछ देश इसके लिए सख्त नियम बना सकते हैं। सवाल 6: बिटकॉइन के फायदे और नुकसान क्या है? फायदे: नुकसान: सवाल 7: बिटकॉइन का भविष्य क्या है? जवाब: अगर ज्यादा लोग और कंपनियां बिटकॉइन इस्तेमाल करें, तो यह और बड़ा हो सकता है। यह ऑनलाइन सामान्य पैसे की तरह बन सकता है, लेकिन इसके लिए नई तकनीक और सरकारी अनुमति जरूरी है।


