भास्कर संवाददाता| खंडवा क्रोध और बैर दुखदाई होकर संसार में भटकाता है। शरीर में विकार से क्रोध की उत्पत्ति होती है। क्रोध रोग का कारण है। क्रोध करने वाला रोगी होता है। रोग रहित व्यक्ति क्षमा धारण करने वाला होता है। जिस प्रकार शरीर की ऊष्मता, पीड़ा हटाने के लिए बर्फ की सिकाई की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार क्रोध और बैर के निराकरण के लिए क्षमा आवश्यक है। क्रोध विराधना है तो क्षमा आराधना यानी अमृत है। अज्ञानी व्यक्ति ही क्रोध करता है। सराफा पोरवाड़ जैन धर्मशाला में विराजमान आचार्य विभव सागर महाराज ने यह विचार व्यक्त किए। उन्होंेने कल्याण मंदिर स्तोत्र विवेचना के 13 सूत्रों का वाचन किया। आचार्य श्री ने कहा कि व्यापार में क्रोध असफलता का कारण है। यह हम सभी जानते हैं और हम सभी व्यापारी हैं। बस व्यापार का तरीका भिन्न है। क्षमा से शक्ति का जागरण होता है। पार्श्वनाथ भगवान क्षमा के सर्वोच्च उदाहरण हैं। हम सभी उनके मानने वालो ने कर्म, क्रोध और मोह को क्षमा व भक्ति से नाश करते चलना चाहिए। बड़े पुण्य भाव से हमें मानव जीवन मिला है। इसका सदुपयोग कर अच्छे कर्म करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएं। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया शहर में पहली बार वर्षों बाद समाज को बड़े अचार्य संघ का सानिध्य मिला है। 44 मंडलीय कल्याण मंदिर विधान कल, होंगे भजन समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र जैन, दिलीप पहाड़िया और विजय सेठी ने बताया 18 दिसंबर को 44 मंडलीय श्री कल्याण मंदिर विधान होगा। यह अनुष्ठान सारस्वताचार्य 108 विभवसागर ससंघ 20 पीछी के सानिध्य में समय दोपहर 12 बजे से श्री महावीर मंदिर बजरंग चौक पर होगा। इस दौरान संगीतकार शुभम जैन जबलपुर द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।


