क्लर्की छोड़ सूअर पालन अपनाया, सालाना 50 लाख टर्नओवर

दूसरा दशक अपनी पूर्णता की तरफ बढ़ रहा था। पंजाब सरकार के आदर्श स्कूल में क्लर्क के तौर पर तनख्वाह कम थी और समय पर भी नहीं मिल रही थी। नौकरी पर रोज 100 किलोमीटर दूर बाजाखाना जाना तकलीफदेह लग रहा था। तत्कालीन सीएम के दरबार में अनुकूल सुनवाई भी नहीं हो पा रही थी। एक बार इन्होंने स्पष्ट कहा-…तो फिर आप कोई अपना काम कर लो। स्वयं की भी इच्छा थी- कोई भी काम करो, अपना करो। और फिर 2018 में उन्होंने अपनी 8 साल की नौकरी को अलविदा कर सूअर पालन (पिगरी) शुरू कर दिया। आज 36 वर्षीय प्रगतिशील किसान का सालाना टर्नओवर 45 से 50 लाख रुपए पहुंच गया है। वह दो लोगों को स्थायी रोजगार दे रहे हैं। यह कहानी मुक्तसर जिले के लालबाई गांव के किसान हरप्रीत सिंह की है, जिन्होंने गिद्दड़बाहा से बीए और बठिंडा से बीएड की पढ़ाई पूरी की। 2011 में नौकरी शुरू की। वह बताते हैं कि किसान परिवार से होने के कारण खेती सहायक धंधों की तरफ उनका सहज लगाव था। 2018 के आसपास सोशल मीडिया पर सूअर पालन के वीडियो देखे। वह इस कृषि सहायक धंधे से प्रेरित हुए। कुछ संकोच था तो पड़ोसी सूबे हरियाणा के रोहतक और रिवाड़ी जिलों में जाकर बड़े सूअर फार्म देखे, जहां उन्हें अपनी शंकाओं का समाधान मिल गया। उसके बाद उन्होंने 20 मादा सूअरों के साथ यह धंधा शुरू किया। उनके बाड़े में 350 से 400 सूअर हैं, जिनकी बदौलत वह अच्छा कमा रहे हैं। एक सूअर 17,000 से 20,000 रुपए में बिकता है। हरप्रीत सिंह संयुक्त परिवार में रहते हैं। उन्होंने 2019 में लुधियाना स्थित गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (गडवासू) से 5 दिन का मूल सूअर पालन प्रशिक्षण लिया। वह स्पष्ट मानते हैं कि पिगरी सभी कृषि सहायक धंधों में सबसे बेहतर विकल्प है, क्योंकि इसे छोटे स्तर पर शुरू किया जा सकता है। इसमें प्रतिस्पर्धा कम है। एक मादा सूअर साल में दो बार प्रजनन करती है। इनकी बदौलत बड़ा बाड़ा तैयार हो गया है। वह बड़ा निर्यातक बनना चाहते हैं। उनका लक्ष्य है कि वह अपने इस फार्म को बड़े स्तर पर ले जाकर अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायी बनाएं, ताकि ये भी इस धंधे के साथ जुड़कर सालाना लाखों रुपए कमाएं। लिहाजा, उन्होंने 10-15 लोगों के सूअर पालन फार्म खुलवाए हैं, जो बेहतर कमाई कर रहे हैं। उन्हें मलाल है कि सूअर पालन के लिए लोन और सब्सिडी सुविधाओं की प्रक्रिया जटिल हैं। इसलिए उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिली। पंजाब में सूअर मंडी नहीं है, इसलिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। देश की सबसे बड़ी सूअर मार्केट असम एवं नागालैंड और दुनिया में चीन व अमेरिका में हैं। हरप्रीत सिंह अपने पिगरी फार्म में। प्रगतिशील किसान हरप्रीत सिंह से और जानने को डायल करें 96085-00001 यह स्टोरी दूसरों से भी शेयर करें आप भी किसान हैं और खेती में ऐसे नवाचार किए हैं जो सभी किसान भाइयों के लिए उपयोगी हैं, तो डिटेल और फोटो-वीडियो हमें अपने नाम-पते के साथ 9464579710 पर सिर्फ वॉट्सएप करें। ध्यान रखें, ये नवाचार किसी भी मीडिया में न आए हों।

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