क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 104 अस्पतालों को नोटिस भेजा है कि पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की अवधि खत्म हो चुकी वह रिन्युअल कराएं। बॉयोमेडिकल वेस्ट के नियमों का पालन करें। बता दें कि 1 से 11 साल से अस्पतालों ने पीपीसीबी से पॉल्यूशन सर्टिफिकेट रिन्युअल नहीं कराया तो इनमें कई ने अप्लाई ही नहीं किया है। इनमें जीरो बेड से लेकर 800 बेड के नामचीन अस्पताल भी शामिल हैं। फिलहाल, नोटिस के बाद भी ये अस्पताल पीपीसीबी से सर्टिफिकेट नहीं लेते तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बायोमेडिकल वेस्ट नियमों का पालना नहीं कराने पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में निजी सुनवाई के लिए भी नोटिस भेजा जा रहा है। बता दें कि जीरा बेड वाले प्राइवेट सरकारी सहित 18 ऐसे अस्पताल हैं, जिन्हें वन टाइम सेटलमेंट के लिए 1 हजार रुपए मामूली रकम देकर पीपीसीबी से ऑथराइजेशन लेना था। लेकिन इन अस्पतालों ने के पास भी अस्पताल चलाने के लिए पीपीसीबी से सर्टिफिकेट नहीं लिया है। इनमें 14 प्राइवेट तो 4 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। ^पीपीसीबी से जिन 104 सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों ने ऑथराइजेशन नहीं लिया, उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया है। पीपीसीबी की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अस्पतालों का दौरा किया जाएगा। बॉयोमेडिकल वेस्ट नियमों का उल्लंघन नहीं करने वालों को 7 दिन में सर्टिफिकेट जारी कर िदया जाता है। ऐसा नहीं है कि फीस जमा करके लाइसेंस ले सकते हैं। अस्पतालों के लिए मेडिकल वेस्ट को लेकर जो नियम बनाए गए, उनका पालन कराना जरूरी है। अस्पतालों ने अप्लाई करना शुरू कर दिया है। बार-बार समझाने के बाद भी नहीं माने तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। -सुखदेव सिंह, एक्सईएन, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समाजसेवी गुरमीत सिंह बबलू ने कहा कि 104 सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों का बिना ऑथराइजेशन चलते रहना हैरानी जनक है। बिना अफसरों के मिलीभगत संभव नहीं हैं। अस्पतालों को बंद क्यों नहीं कराया गया। जीरो बेड वाले अस्पतालों का हाल तो यह है कि 1 हजार रुपए फीस जमा कराने से बचते रहे। 1 साल से 11 सालों तक से अस्पताल बिना ऑथराइजेशन के चल रहे और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते रहे हैं। लेकिन कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।


