आदिवासी ब्लॉक खालवा की रोशनी गौशाला आत्मनिर्भर हो गई है। यह प्रदेश की पहली गौशाला है, जहां से एकलव्य छात्रावास के हॉस्टल में करीब 400 विद्यार्थियों का भोजन पकाने बायोगैस की सप्लाई की जा रही है। शुद्ध दूध विद्यार्थियों को मिल रहा है। गाय के दूध, गोबर गैस, गोबर और गोमूत्र खाद से महिलाओं के समूह को हर महीने 1.80 लाख रुपए की आय भी हो रही है। खंडवा से 50 किमी दूर रोशनी की गौशाला में 305 गो-माता है। जिनका सरंक्षण “श्री राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह” की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। 2019 में मनरेगा के तहत गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर जिला प्रशासन ने काम शुरू किया। गोबर खाद से हर साल 6 लाख रु. की हो रही आमदनी गौशाला से हर साल 5 से 6 लाख रुपए की समूह को आय हो रही है। वहीं गौशाला में हर दिन एक हजार लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है। गोमूत्र में गुड, बेसन, मिट्टी, गोबर मिलाकर जीवामृत यानी लिक्विड खाद बना जा रहा है। इसकी बिक्री से हर माह 30 हजार रुपए की आय हो रही है। जिला पंचायत सीईओ डॉ.नागार्जुन बी गौड़ा ने बताया कि जिले की अन्य गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।


