खंडवा हादसे में बेटियों को गंवाने वाले परिवारों का दर्द:चंदा की मां बोलीं- वह मुझसे मिलकर नहीं गई, पुजारी की बेटियां मूर्ति के साथ डूबी

मैं अपनी तीन बेटियों और एक बेटे के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही था। माता की मूर्ति भी साथ थी। ड्राइवर ने किसी से कुछ नहीं पूछा और सीधे ट्रैक्टर को गहरे पानी में उतार दिया। देखते ही देखते ट्रॉली पलट गई और सब कुछ डूब गया। ये बताते हुए पाडरफाटा गांव के पुजारी प्यार सिंह फूट-फूट कर रोने लगते हैं। प्यार सिंह की दो बेटियां, 18 साल की शर्मिला और 16 साल की आरती की इस हादसे में मौत हो गई। प्यार सिंह सवाल पूछते हैं कि अब मेरे घर को कौन संभालेगा? यही सवाल उर्मिला का भी है, जिसने अपनी 14 साल की बेटी संगीता को खो दिया है। उर्मिला कहती है, ‘वो ही मेरा सहारा थी।’ खंडवा हादसे में जान गंवाने वाले हर शख्स का अपना दर्द है। सभी लोग उस पल को याद कर रहे हैं जब उनके बच्चे देवी विसर्जन के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली पर सवार हुए थे। बता दें, खंडवा में गुरुवार को दुर्गा विसर्जन के दौरान डैम के बैक वाटर में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट जाने से 11 लोगों की जान चली गई थी। ट्रॉली में दुर्गा प्रतिमा के साथ करीब 30 लोग सवार थे। जान गंवाने वालों में 8 साल की बच्ची से लेकर 25 साल तक की महिला शामिल है। भास्कर ने चुनिंदा परिवार से बात कर उनके दर्द को समझने की कोशिश की। पढ़िए रिपोर्ट मेरी बेटी तो माता रानी को ठंडा करने गई थी
हमारी टीम सबसे पहले 14 साल की संगीता के घर पहुंची। घर के बाहर लोगों की भीड़ थी और अंदर से उसकी मां उर्मिला बाई के रोने की आवाज आ रही थी। वह लगभग बेहोशी की हालत में थीं, आंखें बंद किए हुए बस एक ही बात दोहरा रही थीं, ‘मेरी बेटी तो माता रानी को ठंडा करने गई थी। पानी में ट्रैक्टर पलटी खा गया और वो चली गई।’ उर्मिला ने कहा, ‘ड्राइवर ने जबरदस्ती ट्रैक्टर को गहरे पानी में डाल दिया, इसीलिए वो पलट गया। मेरे पति नहीं हैं, बस एक छोटा बेटा बचा है।’ संगीता की मामी ने बताया कि उनके ननद (उर्मिला बाई) के पति की 7 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। अब यह बेटी ही उनके बुढ़ापे का सहारा थी। संगीता होनहार थी और खंडवा के एक सरकारी छात्रावास में रहकर 10वीं की पढ़ाई कर रही थी। दशहरे की छुट्टियों में वह घर आई थी। उसने पूरे नौ दिन का व्रत रखा था और बड़े उत्साह के साथ विसर्जन के लिए तैयार होकर गई थी। किसे पता था कि यह उसका आखिरी दिन होगा। जिस पुजारी ने 9 दिन पूजा की, उसी की दो बेटियां विसर्जित हो गईं
इसी बीच एक और एम्बुलेंस पहुंची, जिसमें दो शव रखे थे। ये शव गांव के ही आदिवासी पुजारी प्यार सिंह की बेटियों, 18 साल की शर्मिला और 16 साल की आरती के थे। प्यार सिंह वही शख्स थे जिन्होंने गांव में स्थापित देवी प्रतिमा की नौ दिनों तक पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना की थी। जैसे ही बेटियों के शव बाहर निकाले गए, महिलाएं दहाड़ें मारकर रोने लगीं। प्यार सिंह, जो खुद उस ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार थे, कांपती हुई आवाज में उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताते हैं, ‘मैं अपनी तीन बेटियों और एक बेटे के साथ ट्रैक्टर की ट्रॉली में ही था। माता की मूर्ति भी साथ थी। ड्राइवर ने किसी से कुछ नहीं पूछा और सीधे ट्रैक्टर को गहरे पानी में उतार दिया। देखते ही देखते ट्रॉली पलट गई और सब कुछ डूब गया।’ उनकी आवाज भर्रा गई। ‘ट्रॉली के नीचे दबकर मेरी दो बेटियों की मौत हो गई। आरती ठीक माता की मूर्ति के सामने बैठी थी और शर्मिला मूर्ति को पकड़कर बगल में खड़ी थी। मैं, मेरी एक और बेटी दुर्गा और बेटा दीपक किसी तरह बच गए क्योंकि हम ट्रॉली के नीचे नहीं दबे। पास के जामली गांव के लोगों ने हमें बाहर निकाला।’ अपनी बेटियों को याद करते हुए वह बिलख पड़े, “मेरी बेटियां मेरा बहुत ख्याल रखती थीं। वे पूरे घर को स्वर्ग बनाकर रखती थीं। मुझे खाना बनाकर खिलाती थीं। अब कौन करेगा यह सब?” इतना कहते-कहते प्यार सिंह सिर पर हाथ रखकर जमीन पर बैठ गए। पहाड़ी पर बसे तीन घर, तीनों ने खोए अपने बेटे
गांव में जहां माता की मूर्ति रखी थी, वहां से करीब 2 किलोमीटर दूर खेतों के बीच एक पहाड़ी पर तीन घर बने हुए हैं। दुर्भाग्य देखिए, इस हादसे ने इन तीनों घरों के चिराग बुझा दिए। तीनों घरों ने अपने एक-एक बेटे को खो दिया है। 8 साल के मृतक आयुष के पिता औरंगाबाद में नौकरी करते हैं और दशहरे की छुट्टियों पर घर आए हुए थे। उन्होंने नम आंखों से बताया, ‘मेरा 8 साल का बेटा गांव के ट्रैक्टर में चढ़कर माता का विसर्जन करने चला गया था। मुझे तो इस बात की जानकारी भी नहीं थी। जब घटना घट गई, उसके डेढ़ घंटे बाद मुझे पता चला।’ उनका दर्द तब और गहरा हो जाता है जब वो बताते हैं, ‘मेरी एक बेटी और दो बेटे हैं। एक बेटे के हाथों में उंगलियां नहीं हैं। आयुष ही शारीरिक तौर पर पूरी तरह ठीक था, भगवान ने मुझसे उसे भी छीन लिया।’ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों और बचे हुए लोगों के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली में बच्चों और महिलाओं समेत करीब 30 लोग सवार थे। सभी नाचते-गाते विसर्जन के लिए जा रहे थे। जब वे नदी के पास पहुंचे, तो ड्राइवर ने कथित तौर पर लापरवाही दिखाते हुए और गहराई का अंदाजा लगाए बिना ट्रैक्टर को सीधे पानी में उतार दिया। पानी का बहाव तेज था और जमीन दलदली। ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ा और पूरी ट्रॉली पलट गई। जो लोग ट्रॉली में बैठे थे, वे उसके नीचे दब गए और उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। जब तक आसपास के लोग मदद के लिए पहुंचते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक साथ उठीं अर्थियां, पूरा गांव रोया
पाडरफाटा में 7 बच्चों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया, जबकि दो बेटियों का अंतिम संस्कार गोरखपुर में हुआ। जब एक साथ इतनी अर्थियां उठीं, तो पूरा गांव रो पड़ा। आसमान भी शायद इस गांव के दर्द में शामिल था। जिन बच्चों की किलकारियों से यह गांव गूंजता था, आज वहां मौत का सन्नाटा था। यह एक ऐसी क्षति थी, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। ये खबर भी पढ़ें…. एक ही वक्त जली 11 चिताएं:8 साल की चंदा के शव के पास खेलती रहीं बहनें; खंडवा हादसे के पीड़ित परिवारों से मिले सीएम खंडवा में दुर्गा विसर्जन के दौरान हुए हादसे में जान गंवाने वाले 11 लोगों का शुक्रवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। गुरुवार को जहां शोभायात्रा में सभी डीजे पर डांस कर रहे थे, आज वहीं परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में शोक का माहौल है। जिस 8 साल की चंदा का शव सबसे आखिरी में पानी से निकाला गया था, उसकी दो छोटी बहनें हैं। दोनों बहनें चंदा के शव के आसपास खेलती रहीं। वे इस बात से अनजान हैं कि उनकी बड़ी बहन चंदा की मौत हो चुकी है। पढ़ें पूरी खबर

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