छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 31 दिसंबर को खत्म हो रही है। एक सप्ताह पहले राज्य शासन की ओर से सभी निकायों को चिट्ठी जारी कर कहा गया था कि मियाद खत्म होने तक अधूरे मकानों के पैसे नहीं दिए जाएंगे। ऐसे में लगभग 25 हजार से ज्यादा निर्माणाधीन आवासों के हितग्राही चिंता में पड़ गए थे। पैसे नहीं मिलने की सूचना पर ठेकेदारों ने काम भी बंद कर दिया था। भास्कर ने यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी, जिसके बाद सोमवार को नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया कि जितने भी निर्माणाधीन मकान हैं, उन्हें पूरे पैसे जारी किए जाएंगे। इसके लिए राज्य शासन के पास पर्याप्त बजट है। दरअसल, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में दो लाख 43 हजार 261 आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें हितग्राहियों द्वारा खुद की भूमि पर बनाए जाने वाले दो लाख 11 हजार 69 और किफायती आवासीय परियोजनाओं के तहत बनने वाले 38 हजार 097 आवास शामिल हैं। जबकि योजना के तहत वर्तमान में 25 हजार मकान निर्माणाधीन है। सिर्फ 481 मकान ही प्रारंभ नहीं हुए हैं।इसे लेकर हाल ही में नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि अभी जितने भी आवास के काम चल रहे हैं उसे 31 दिसंबर तक पूरा करना होगा। इसके बाद अधूरे मकान के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कोई भी राशि जारी नहीं की जाएगी। 481 मकानों को योजना 2.0 में शामिल करने की तैयारी
राज्य सरकार किसी भी पात्र हितग्राही को आवास से वंचित नहीं करेगी। पीएम आवास शहरी योजना के खत्म होने के बाद भी निर्माणाधीन सभी मकानों का पूरा पैसा जारी करेगी। इसके अलावा जो 481 मकान शुरू नहीं हुए हैं उन्हें पीएम आवास शहरी 2.0 में शामिल किया जाएगा।
अरुण साव, मंत्री, नगरीय प्रशासन विभाग


