रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट में 32 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले में ईओडब्ल्यू के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने कार्रवाई शुरू कर दी है। एजेंसी की टीमों ने सोमवार सुबह रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कुछ जगहों पर ताले लगे मिले और अधिकारी अपने घरों से गायब थे। जहां अधिकारी और कारोबारी मिले, वहां देर रात तक जांच चली। इस दौरान नकदी, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं, जिन्हें एजेंसी के अफसरों ने अपने कब्जे में ले लिया है। ईडी की टीम प्रॉपर्टी डीलर हरमीत सिंह खनूजा के नवा रायपुर स्थित घर पहुंची। इसके बाद महासमुंद में उनके ससुराल हरमीत चावला और जसबीर सिंह बग्गा के घर भी टीम गई। जहां देर रात तक जांच चलती रही। जिनके यहां कार्रवाई की गई, उनमें तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू भी शामिल हैं। जो लोग ठिकानों पर नहीं मिले उनके यहां नोटिस चस्पा किया गया है। इन राजस्व अधिकारियों के घरों में छापा तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू, आरआई रोशन लाल वर्मा, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, पटवारी जितेंद्र साहू, बसंती घृतलहरे, दिनेश पटेल और लेखराम देवांगन के घरों में छापेमारी की। रोशन लाल वर्मा समेत अन्य अधिकारी अपने घरों से गायब मिले। तत्कालीन कलेक्टर समेत कई की भूमिका की जांच ईडी उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्हें पहले ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया था। इनमें तत्कालीन पटवारी गोपाल राम वर्मा, पीएचई अधिकारी नरेंद्र नायक, गृहिणी उमा तिवारी, उनके पति केदार तिवारी, कारोबारी विजय जैन, खेमराज कोसले, पुनुराम देशलहरे, भोजराम साहू और अभनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष कुंदन बघेल शामिल हैं। सभी को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इसके बाद ईडी ने जांच शुरू की है। घोटाले के लिए ऐसे तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज हरमीत खनूजा की पत्नी तहसीलदार हैं। हरमीत ने कारोबारी विजय जैन, खेमराज कोसले और केदार तिवारी के साथ मिलकर बैकडेट में किसानों से फर्जी बंटवारा, नामांतरण के दस्तावेज तैयार कराए। साथ ही ब्लैंक चेक और आरटीजीएस फॉर्म पर हस्ताक्षर कराए। आईसीआईसीआई बैंक, महासमुंद में खाते खुलवाकर मुआवजे की राशि कई निजी संस्थाओं में जमा कराई गई और बाद में उसे निकालकर आपस में बांट लिया गया।


