उदयपुरवाटी विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में अवैध खनन और भारी ब्लास्टिंग के विरोध में सोमवार को ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। बामलास, हुकुमपुरा, खेदड़ो एवं खरबासों की ढाणी के सैकड़ों ग्रामीण लामबंद होकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देकर प्रशासन पर मिलीभगत और सुनवाई न करने के गंभीर आरोप लगाए। मरुसेना फाउंडेशन के एडवोकेट जयंत मूंड ने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का उदासीन रवैया चिंताजनक है। यदि अवैध खनन पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो आंदोलन को और तीव्र एवं व्यापक बनाया जाएगा। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से धरना और ज्ञापन देने का निर्णय लिया। प्रशासन से मांग की गई है कि अवैध खनन स्थलों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। ब्लास्टिंग से 1500 मीटर तक के मकानों में आई दरारें कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि खनन पट्टा धारक आवंटित क्षेत्र से कहीं अधिक हिस्से में अवैध खनन कर रहे हैं। ‘इंडस्ट्रियल रॉक्स’ (IR) के नाम पर की जा रही भारी ब्लास्टिंग के कारण आस-पास के 1500 मीटर के दायरे में स्थित मकानों की नींव हिल गई है और दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों का सर्वे करवाकर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। गौचर और श्मशान भूमि पर कब्जे का आरोप प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि रसूखदार लीज धारकों ने नियमों को ताक पर रखकर गौचर (चरागाह) भूमि पर अवैध स्टॉक यार्ड बना लिए हैं और श्रमिकों के लिए पक्के निर्माण कर लिए हैं। ग्रामीणों ने श्मशान भूमि पर भी अतिक्रमण की शिकायत की। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को बार-बार अवगत कराने के बावजूद धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ज्ञापन में पर्यावरण को हो रहा है नुकसान नष्ट हुई हरियाली: हजारों की संख्या में पेड़ काट दिए गए, जबकि NGT की गाइडलाइंस के अनुसार नए पेड़ लगाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। जल स्तर में गिरावट: भारी ब्लास्टिंग और प्राकृतिक संरचना से छेड़छाड़ के कारण क्षेत्र का भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। डैम ध्वस्त: जल संरक्षण के लिए बनाए गए डैम भी नष्ट हो गए। जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। फसलों पर संकट: खनन से उड़ने वाली धूल (डस्ट) खेतों और पेड़ों पर जम रही है, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर होती जा रही है। मुख्यमंत्री और लोकायुक्त के नाम ज्ञापन ग्रामीणों ने इस मामले की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, मुख्य सचिव, लोकायुक्त और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) भोपाल को भी भेजी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर निष्पक्ष जांच नहीं की गई और अवैध खनन नहीं रोका गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।


