भास्कर न्यूज | बलौदाबाजार सोमवार की सुबह 3 बजकर 22 मिनट पर सूर्य ने अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश किया जिससे खरमास की समाप्ति हो गई और एक बार फिर मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो गया। सूर्य के इस राशि परिवर्तन से जहां धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व जुड़ा है, वहीं आम जनजीवन पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। खरमास के चलते पिछले एक माह से विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित थे, लेकिन अब इन पर से रोक हट गई है। इससे शहर और गांवों में एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगी है। खरमास की शुरुआत 14 मार्च को हुई थी, जबकि इससे पहले 6 मार्च से होलाष्टक लगने के कारण भी शुभ कार्यों पर विराम लगा था। अब खरमास के समाप्त होते ही 10 जून तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त हैं। हालांकि, 12 जून को गुरु के अस्त होने से फिर विवाह रुक जाएंगे। पंडित पृथवी पॉल के अनुसार भड़ली नवमी तक यानी 4 जुलाई तक विवाह मुहूर्त रहेंगे, लेकिन 10 जून के बाद तारा अस्त के कारण शुभ विवाह नहीं होंगे। 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व है, जिसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। इस दिन बिना पंचांग देखे विवाह जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। यही कारण है कि इस दिन शादी के लिए अत्यधिक बुकिंग रहती है। पंडित पृथवी पॉल के अनुसार मांगलिक कार्यों का अगला शुभ काल 1 नवंबर से देवउठनी एकादशी से शुरू होगा। सूर्य के मेष राशि में गोचर से गर्मी में वृद्धि होगी, वहीं शुक्र के मार्गी होने से वातावरण में शुभता और भी बढ़ेगी। जायसवाल टेंट हाउस के संचालक सोनू जायसवाल ने बताया कि अप्रैल, मई और जून के विवाह मुहूर्त पहले से ही फुल बुक हैं। खासकर 18 अप्रैल से 30 अप्रैल तक के आठ दिनों में सबसे ज्यादा शादियों की बुकिंग है। डेस्टिनेशन वेडिंग का क्रेज भी इन दिनों लोगों में तेजी से बढ़ा है।


