खरसावां गोलीकांड की बरसी के अवसर पर लोहरदगा राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा जिला समिति की ओर से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित की गई। कार्यक्रम में शहीदों को नमन करते हुए माल्यार्पण किया गया व मोमबत्तियां जलाकर 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर समिति के प्रतिनिधि जलेश्वर उरांव और सुधीर उरांव ने कहा कि 1 जनवरी आदिवासी समाज के लिए काला दिवस है। कार्यक्रम में सुरेंद्र उरांव, सोमदेव उरांव, बालमुकुंद लोहार, प्रेम प्रकाश भगत सहित बड़ी संख्या में महिलाएं व पुरुष उपस्थित रहे। वक्ताओं ने खरसावां गोलीकांड के इतिहास, उसके सामाजिक प्रभाव तथा आदिवासी समाज के अधिकारों पर पड़े प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सोमे उरांव ने खरसावां गोलीकांड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हुए कहा कि यह घटना आदिवासी समाज के संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने समाज से शिक्षा, संगठन और अधिकारों के प्रति जागरूक व एकजुट रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने मांग की कि शहीदों के सम्मान में सरकारी स्तर पर ठोस पहल की जाए, सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाए व आने वाली पीढ़ियों को इस ऐतिहासिक घटना से अवगत कराया जाए। कार्यक्रम के अंत में सरना समाज ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समापन किया व समाज की एकता व अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।


