खाकी का ‘स्टूडेंट’ कनेक्ट, झुंझुनूं में थाने बने पाठशाला:विद्यार्थियों ने जाना—कैसे दर्ज होती है FIRविशेष पहल: युवा दिवस पर एसपी की अनूठी मुहिम, कानून और सुरक्षा का सीखा पाठ

युवा दिवस के अवसर पर झुंझुनूं पुलिस ने खाकी और अवाम के बीच की दूरी को पाटने के लिए एक अनूठी पहल की है। पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय के निर्देश पर जिले के तमाम पुलिस थानों में स्टूडेंट्स ने विजिट की। थानों में होने वाले कामकाज को समझा। जिले थाने किसी दफ्तर की तरह नहीं, बल्कि एक स्कूल की तरह नजर आए, जहाँ वर्दीधारी अधिकारियों ने विद्यार्थियों को कानून की बारीकियों का पाठ पढ़ाया। पहली बार देखा हवालात और मालखाना, मिटा मन का डर अब तक फिल्मों या कहानियों में पुलिस थाने का जो रूप बच्चों ने देखा था, हकीकत उससे काफी अलग मिली। कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों ने थाने के विभिन्न कक्षों का भ्रमण किया। थानाधिकारियों ने उन्हें बताया कि अपराध होने पर सूचना कैसे दी जाती है, रोजनामचा (जीडी) क्या होता है और मालखाने में सामान को कैसे सुरक्षित रखा जाता है। पुलिस की इस कार्यप्रणाली को करीब से देखकर छात्रों के मन से पुलिस का भय दूर हुआ और एक सकारात्मक छवि उभरी। साइबर अटैक और नशे के जाल से बचने की दी ‘टिप्स’ पुलिस अधिकारियों ने वर्तमान समय की चुनौतियों पर फोकस करते हुए विद्यार्थियों को जागरूक किया। डिजिटल सेफ्टी: सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती के खतरे और साइबर फ्रॉड से बचने के तरीके। रोड सेफ्टी: यातायात नियमों को बोझ नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का कवच मानने की सीख। नशे पर प्रहार: नशे के दलदल से खुद को और दोस्तों को बचाने की शपथ। स्मार्ट पुलिसिंग: राजकॉप सिटिजन ऐप और विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की उपयोगिता। सवाल-जवाब से सुलझीं उलझनें भ्रमण के दौरान ‘पुलिस-विद्यार्थी संवाद’ का सत्र सबसे रोचक रहा। छात्रों ने बेझिझक सवाल किए— “एफआईआर दर्ज करवाने के लिए क्या जरूरी है?”, “महिला सुरक्षा के लिए पुलिस क्या करती है?” और “पुलिस में भर्ती होने के लिए क्या करना पड़ता है?” अधिकारियों ने बड़ी आत्मीयता से इन सवालों के जवाब दिए और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय ने कहा कि युवाओं में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाना और उन्हें अपराधों के प्रति सतर्क करना हमारा मुख्य उद्देश्य है। जब जिले का युवा जागरूक होगा, तभी एक सुरक्षित समाज की नींव रखी जा सकेगी। यह संवाद निरंतर जारी रहना चाहिए।

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