खाद्यान्न सामग्री खरीद घोटाला:सीएम के आदेश पर अब टीएडी ने 3 सदस्यीय कमेटी गठित की, 15 दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी

जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग से संबंधित तथाकथित खाद्यान्न सामग्री खरीद घोटाले पर अब प्रदेश की भजनलाल सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर अब टीएडी अतिरिक्त आयुक्त प्रथम गीतेशश्री मालवीया ने इस मामले की जांच कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के आदेश जारी किए हैं। अतिरिक्त आयुक्त मालवीया ने संयुक्त निदेशक एवं प्रभारी अधिकारी शिक्षा भंवरलाल मीणा, सहायक निदेशक सांख्यिकी एवं प्रभारी अधिकारी माडा डॉ. विष्णु प्रकाश जोशी और सहायक लेखाधिकारी ग्रेड-2 प्रशांत तिवारी की जांच कमेटी गठित की है। इस तीन सदस्यीय जांच कमेटी को सहकारी उपभोक्ता थोक भंडार द्वारा आवासीय-छात्रावासों में सप्लाई की गई खाद्यान्न व दैनिक उपयोग में आने वाली सामग्री की दरों व भुगतान की जांच कर आगामी 15 दिनों में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करनी होगी। प्रकरण यह है कि शक्कर, कोलगेट, बिस्किट, एक ही खाद्य सामग्री की खरीद में उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बारां सहित अन्य जिलों में अगल-अलग दरों से खरीद-फरोख्त का मामले सामने आया है। विगत विधानसभा सत्र में इस मामले को धरियावद विधायक थावरचंद डामोर की अगुवाई में बीएपी विधायकों ने विधानसभा में भी उठाया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी इस मामले को बीच-बीच में उठाते रहे हैं। हालांकि, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा प्रदेश की भाजपा सरकार का बचाव करते दिखाई देते रहे हैं। राजभवन, मुख्यमंत्री कार्यालय और टीएडी मंत्री के निर्देशों के बावजूद 6 महीने तक नहीं हुई जांच, सब जिलों में भुगतान के बाद अब कैसे होगी रिकवरी? इस मामले को लेकर शिकायत के बाद 28 अक्टूबर 2024 को मुख्यमंत्री कार्यालय ने टीएडी के प्रमुख शासन सचिव को कार्यवाही के निर्देश दिए थे। वहीं, राजभवन ने भी 11 फरवरी 2025 को शासन सचिव को कार्रवाई करने व राज्यपाल सचिवालय को सूचित करने के निर्देश दिए थे। टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने भी 2 बार पत्र लिखकर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने 6 महीने में कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि उपभोक्ता भंडारों को भुगतान करवा दिया। अब जयपुर में विभाग की समीक्षा बैठक मे भी इस मामले में मंत्री अधिकारियों से चर्चा करेंगे। 4 अक्टूबर को सहकारिता विभाग ने लगाई थी फर्मों को भुगतान करने पर रोक, लेकिन उपभोक्ता भंडारों ने कर दिया करोड़ों का भुगतान खाद्यान्न सामग्री की दरों में असमानता व मिस ब्रांड आपूर्ति का मामला खुलने के बाद 4 अक्टूबर को तत्कालीन अतिरिक्त रजिस्ट्रार, उदयपुर प्रेम प्रकाश माण्डोत ने एक आदेश जारी कर मामले की जांच पुर्ण होने तक फर्मों को भुगतान करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन उपभोक्ता भंडारों के अधिकारियों ने आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए फर्म को भुगतान कर दिया जबकि जांच अभी तक भी पुरी नहीं हुई है। विधानसभा में गूंज चुका है यह मामला बीएपी के धरियावद विधायक थावरचंद डामोर, आसपुर विधायक उमेश डामोर, बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल और चौरासी विधायक अनिल कुमार कटारा ने राजस्थान विधानसभा में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग मुख्यालय उदयपुर पर 5 रुपए के बिस्किट को साढ़े 5 रुपए, 20 रुपए का कोलगेट पेस्ट 24 रुपए में खरीदने सहित खाद्य-दैनिक उपयोग की सामग्री की आपूर्ति में करोड़ों रुपए के घोटाले के आरोप लगाए थे। आसपुर विधायक उमेश डामोर ने घटिया खाद्यान्न सामग्री आपूर्ति का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जनजाति के लोगों को कीड़े-मकोड़े समझती है? बच्चों को कीड़े-मकौड़े वाली खाद्य सामग्री खाने में खिलाई जा रही है। खाद्यान्न सामग्री की जांच में सैंपल सब स्टेंडर्ड पाए गए, ये लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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