चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देश पर राजस्थान के विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक भोजन और मोटे अनाज का महत्व बताया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रतापगढ़ जिले के पीपलखूंट स्थित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में एक जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीवराज मीणा के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुनील कुमार पामेचा ने बच्चों को मोटा अनाज (श्री अन्न) के फायदे और जंक फूड के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुनील कुमार पामेचा ने बताया कि सत्र का उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ भोजन की आदतों से जोड़ना और उनके दैनिक आहार में पोषक तत्वों की भूमिका समझाना था। उन्होंने विद्यार्थियों को सरल और रोचक तरीके से जानकारी दी। पामेचा ने बच्चों को बताया कि ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी, सावा, चौलाई जैसे मोटे अनाज उच्च पोषण प्रदान करते हैं। ये शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन, फाइबर और आवश्यक खनिज पदार्थ देते हैं। मिलेट्स का नियमित सेवन मोटापा, मधुमेह और पाचन संबंधी कई बीमारियों से बचाव में सहायक होता है। इसके विपरीत, अत्यधिक जंक फूड और पैकेज्ड स्नैक्स के सेवन से बच्चों में मोटापा, ब्लड प्रेशर, दांतों की सड़न, ध्यान में कमी और थकान जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। पामेचा ने बच्चों को यह भी समझाया कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय फूड लेबल, एक्सपायरी डेट और FSSAI मार्क अवश्य देखें। उन्होंने घर में बने ताजे भोजन, हरी सब्जियों, फलों और मिलेट्स पर आधारित व्यंजनों का अधिक से अधिक उपयोग करने की सलाह दी। सत्र के दौरान विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर दिए गए और उन्हें ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान की जानकारी भी दी गई। विद्यालय प्रभारी प्रिंसिपल आर. एल. मीणा ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक बदलाव लाने में अत्यंत प्रभावी हैं। इस कार्यशाला में विद्यालय के कुल 332 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस अवसर पर अध्यापक अर्चिता, शारदा, कोमल शुभम, जालंधर नाथ और राहुल भी उपस्थित थे।


