बमौरी के बागेरी डबल लॉक खाद वितरण केंद्र पर यूरिया लेने के लिए रात में ही लाइन में लगी एक आदिवासी महिला की मौत हो गई। इस हादसे ने जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता और वितरण व्यवस्था के सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी। तबीयत बिगड़ने के बाद महिला को बमोरी स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल लाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिली। जब जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया तो वहां से वापस गांव जाने के लिए भी शव वाहन नहीं मिला। महिला का पीएम भी नहीं कराया गया है जिससे मौत का सही कारण सामने आ सके। जानकारी के अनुसार कुशेपुर गांव में सहरियाओं के शिकारी के टपरों में रहने वाली भूरी बाई पत्नी गजराज सिंह तीन दिन से खाद लेने के लिए जा रही थी। जब तक उसका नंबर आता था तब तक वितरण बंद हो जाता था, इसके चलते बुधवार को वह अपने बेटे और बेटी के साथ रात में केंद्र पर पहुंच गई। रात करीब 11 बजे उसे अचानक से उल्टियां होने लगीं। नींद से जागा प्रशासन : मौत के बाद सुधार की कवायद, एक और मशीन चालू, दो घंटे ज्यादा वितरण हमेशा की तरह सोए हुए प्रशासन की नींद एक मौत के बाद ही खुली। गुरुवार को दो के बजाए तीन मशीनें चालू कराकर वितरण शुरू कर दिया गया। हर दिन शाम 4.30 बजे तक ही खाद वितरण हो रहा था, लेकिन गुरुवार को 6.30 बजे तक खाद बांटी गई। व्यवस्थाओं के लिए पुलिस और राजस्व का अमला भी मौजूद रहा। जो महिला चार दिन कतार में खड़ी रही और खाद नहीं मिला उसके बेटे मनोज को घर पर ही खाद पहुंचाने का आश्वासन दिया गया। अब किसानों को 10-10 कट्टे खाद बांटी जा रही है। इसका जवाब तो कलेक्टर साहब से ही लेंगे कि लंबी-लंबी लाइन क्यों लग रही हैं, क्या बात है? क्या बात बताओ ना, आपकी व्यवस्था कैसी है, क्या महाराज साहब को बदनाम करना चाहते हो? क्या महाराज में क्षेत्र में ऐसा हो रहा है? रात भर वह महिला तड़पती रही और मर गई, उसका क्या कारण था? पहले इस बात का जवाब दिया जाए।


