झालावाड़ के पिड़ावा तहसील के ग्राम खारपाखुर्द के ग्रामीणों ने अपने गांव के स्कूल को ग्राम कोटड़ी के स्कूल में विलय करने के फैसले का विरोध किया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में उपखंड अधिकारी पिड़ावा को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्कूल को खारपाखुर्द में ही संचालित रखने की मांग की गई। ग्रामीणों ने बताया कि खारपाखुर्द गांव का स्कूल कोटड़ी गांव में मिला दिया गया है, जबकि दोनों गांवों के बीच लगभग 4 से 5 किलोमीटर की दूरी है। इतनी दूरी तय कर छोटे बच्चों का रोज आना-जाना न केवल कठिन होगा, बल्कि इससे उनकी सुरक्षा और पढ़ाई भी प्रभावित होगी। अभिभावकों को भी बच्चों को लाने-ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि खारपाखुर्द गांव में करीब 50 छोटे बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों के लिए गांव में ही स्कूल का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल संचालन के लिए भवन की कोई कमी नहीं है। गांव के निवासी तेजसिंह पिता करणसिंह ने निशुल्क भवन उपलब्ध कराया है, जिसके लिए कोई किराया नहीं लिया जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि खारपाखुर्द स्कूल का किसी अन्य स्कूल में विलय न किया जाए और इसे यथावत गांव में ही संचालित रखा जाए। उन्होंने उपखंड अधिकारी से संबंधित शिक्षा विभाग को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की। इस मौके पर मागीलाल, संजय, बगदूलाल, भूपेन्द्रसिंह, रामसिंह, नाहरसिंह, नंदसिंह, कुशालसिंह, दिलीपसिंह, कैलाश, किशनजी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।


