शहर के नालों का गंदा पानी सीधे जीवनदायिनी खारुन में समा रहा है। तीन साल पहले शहर के अलग-अलग नालों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए 261 करोड़ की लागत से तीन अलग-अलग सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया गया था। इनमें से चंदनीडीह एसटीपी के जरिए ही चिंगरी नाला, गोवर्धन नाला, वंडर पार्क नाला, अटारी नाला और पंपहाउस नाले का गंदा पानी पहले साफ करना था। इसके बाद खारुन नदी में साफ पानी छोड़ना था। रायपुर नगर निगम की टीम ने एसटीपी तो बना लिया, लेकिन जो नाले सीधे खारुन में मिल रहे थे, उन्हें बंद करना भूल गया। इसके चलते आधे शहर का गंदा पानी सीधे खारुन में जाकर मिल रहा है। जिम्मेदार का जवाब, ऐसा है तो दिखवाता हूं
हमने वहां निरीक्षण किया था। वहां पर सीधा कोई भी नाला नहीं है, जो खारुन में मिल रहा है। नाले का पानी पाइपलाइन से ही प्लांट जा रहा है। फिर भी यदि गंदा पानी वहां मिल रहा है, तो उसे जरूर चिह्नांकित करवाता हूं और सुधरवाता हूं।
– विश्वदीप, आयुक्त नगर निगम तीन साल पहले प्लांट बना, बिछाई गई पाइपलाइन
साल 2022 में नगर निगम की ओर से चंदनीडीह में 75 एमएलडी का एसटीपी स्थापित किया गया। साल 2023 में उद्घाटन कर एसटीपी शुरू किया गया। एसटीपी में चिंगरी नाला, गोवर्धन नाला, वंडर पार्क नाला, अटारी नाला और पंपहाउस नाले का दूषित पानी आना था। यहां गंदे पानी को उपचारित करके साफ जल खारुन में छोड़ा जाना था। इसके लिए 700 से लेकर 1800 एमएम व्यास की लंबी पाइपलाइन भी बिछाई गई। यहां पानी उपचारित तो हो रहा है, लेकिन सिर्फ 65 फीसदी की क्षमता पर ही काम कर रहा है।


