कोशिश करने वालों की हार नहीं होती… खिलता बचपन संवरता जीवन अभियान से जुड़े लोगों के लिए यह कहावत सटीक साबित होती है। छह साल पहले गोकुल नगर बावरिया बस्ती के बच्चों के लिए शिक्षा की पहल की गई, जो अब पटल पर आ गई है। इन छह सालों में 335 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया। फलस्वरूप इनमें से 6 बालिकाएं राखी, प्रीति, खुशबू, बैजयंती, लक्ष्मी और नंदनी इस साल कक्षा 10वीं की परीक्षा देंगी। इसके अलावा एक बालक समीर भी 10 वीं में है। साथ ही 12 बालक/बालिकाएं 9 वीं में हैं। यह बदलाव इसलिए भी काबिले तारीफ है, क्योंकि जिस बावरिया बस्ती के यह बच्चे हैं, वहां पढ़ाई को कभी एक तरह से अपराध समझा जाता था। बचपन से ही बच्चों को कमाने खाने में जुटा दिया जाता था। इसलिए इनमें से अधिकांश बच्चे कभी कचरा बीनने और कबाड़े का काम करते थे। इसलिए 2019 में स्वास्थ्य मंदिर संस्था द्वारा किए गए सर्वे में 410 बच्चों में से केवल 45 बच्चे आंगनबाड़ी अथवा छोटी क्लासों में मिले। केवल दो बच्चे 8 वीं तक पहुंचे थे, लेकिन अब 27 बच्चे 8 वीं क्लास में हैं। अब बस्ती में भी उच्च प्राथमिक विद्यालय खुलने जा रहा है, जिसका भवन बन चुका है। इस प्रकल्प में संस्कार और शिक्षा पर जोर दिया जाता है, जिसमें बच्चों को सुबह-शाम पढ़ाना, संस्कार, म्यूजिक क्लास, योग, दोनों समय भोजन, वस्त्र एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। चार शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं, जिनमें दो वालंटियर हैं। कैसे संभव हुआ… 250 बार मां-बाप की काउंसिलिंग की, शिक्षा पर बल दिया स्वास्थ्य मंदिर के निदेशक डॉ. वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि हमें मालूम था कि जिस माहौल में बच्चे रहते हैं उन्हें शिक्षा से जोड़ना कठिन है। कठिन काम के लिए कड़ा परिश्रम करना ही होता है। इसलिए हमने उनकी ज़रूरतों को समझा और मां-बाप की काउंसिलिंग की, जिसमें सेवानिवृत प्राचार्य पुष्कर चतुर्वेदी, मधु व्यास आदि ने 250 से ज्यादा बार इन बच्चों के अभिभावकों की काउंसलिंग की। प्रत्येक शनिवार को काउंसलिंग की जाती है। परिणाम सुखद और प्रेरणादायी है। इन बच्चों के परिवारों की आर्थिक समस्याओं को देखते हुए भी संस्था द्वारा इन्हें कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वह पार्ट टाइम अपनी ज़रूरतों के लिए कुछ पैसा कमा सकें। 85 बच्चों को स्कूलों में भर्ती कराया रणजीत नगर में संचालित खिलता बचपन संवरता जीवन अभियान में बच्चों को बेसिक शिक्षा मुहैया कराई जाती है। अभिभावकों की काउंसलिंग कर 85 बच्चों को आसपास के सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में भर्ती कराया है। इनमें से अधिकांश की फीस और यूनिफार्म का इंतजाम संस्था के प्रयासों से भामाशाहों से कराया जाता है। इस प्रोजेक्ट में बाल कल्याण समिति भी मदद कर ही है। सहायक निदेशक बाल अधिकारी अमित अवस्थी ने बताया कि इस प्रकल्प के जुडे़ बच्चों सहित बस्ती के अन्य लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा और लाभांवित किया जा रहा है।


