भास्कर न्यूज | अंवरी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय तपस्या भवन भखारा द्वारा एक दिवसीय शिविर का आयोजन जैन स्नातक भवन में किया गया। मुख्य अतिथि समाजसेवी भरत नाहर, डॉ. मोहन हरदेल, प्रीतम, समाजसेवी दुलार सिन्हा, मुख्य संचालिका धमतरी बीके सरिता बहन, बीके करुणा बहन थीं। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विषय खुशियों का पासवर्ड था, जिसमें मुख्य वक्ता डायनेमिक ट्रेनर व काउंसलर मुंबई के प्रोफेसर ईवी गिरीश ने कहा कि खुशी सदा होना चाहिए या कभी-कभी। या कभी खुशी या कभी गम। कहीं खुशी परिस्थितियों के अनुसार, तो नहीं बदलती? यदि सफलता मिलती है, तो खुशी और असफल हुए तो.. खुशी गायब। एक उदाहरण देते हुए कहा कि दो व्यक्ति के लिए नींबू पानी है, पर नींबू पानी का ज्यादा सुख किसको मिलेगा जो ज्यादा प्यास होगा। ज्यादा प्यास का मतलब। इच्छा, तृष्णा, चाहिए। ज्यादा प्यार का प्यास, सम्मान का प्यास खुशी गायब कर देती है। उन्होंने कहा कि जीवन का आधार क्या होना चाहिए- देना। देवी- देवता के चेहरे और हाथ सदा मुस्कुराते हुए और देने की भाव रहता है, इसलिए देवता कहलाते हैं। आपके लिए 3 बातें हैं। खुशी के लिए जीना चाहिए, पैसा के लिए जीना चाहिए, मान सम्मान के लिए। हमें खुशी के लिए जीना चाहिए खुशी-खुशी से जीना है। खुशी का आधार है सत्य ज्ञान। खुशी अंदर से होनी चाहिए। आप खिले हुए गुलाब बन जाओ, गुलाब सभी को पसंद है। बताना नहीं पड़ता। सभी को आकर्षित करता है।


