हनुमानगढ़ में राज्य वृक्ष खेजड़ी और राज्य पुष्प रोहिड़ा की अंधाधुंध कटाई रोकने के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग तेज हो गई है। जांगिड़-सुथार समाज समिति ने इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। समिति अध्यक्ष राधेराम सुथार के नेतृत्व में सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण पर चिंता व्यक्त की। ज्ञापन में बताया गया है कि प्रदेश में चल रहे बड़े विकास परियोजनाओं के कारण लाखों हरे पेड़, विशेषकर खेजड़ी और रोहिड़ा, बिना किसी ठोस नियम के काटे जा रहे हैं। जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बालोतरा, फलोदी और बीकानेर जैसे जिलों में खेजड़ी, जाल, कुमट और फोग के पेड़ बड़े पैमाने पर नष्ट हो चुके हैं। इस अंधाधुंध कटाई से न केवल पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है, बल्कि पारंपरिक जीवनशैली और जैव विविधता पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। समिति ने मौजूदा कानूनी प्रावधानों पर असंतोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि वर्ष 1955 के कानून में जुर्माने की राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए करना पर्याप्त नहीं है। वर्तमान परिस्थितियों में यह सजा नाकाफी है और इससे पेड़ों की कटाई पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। इसलिए एक अलग से सशक्त “ट्री एक्ट” बनाने की मांग की गई है। इस नए कानून में अवैध कटाई पर कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले पेड़ों की गिनती और जियो-टैगिंग अनिवार्य की जाए। इसके साथ ही, ग्राम पंचायत या नगर निकाय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना आवश्यक हो और हर परियोजना में ग्रीन बेल्ट विकसित करना अनिवार्य किया जाए। कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वन या पुलिस विभाग को पर्याप्त जिम्मेदारी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कानून नहीं बनाया गया, तो 2 फरवरी से बीकानेर मुख्यालय पर बेमियादी महापड़ाव किया जाएगा।


