लाखाराम जाखड़/ नरपत रामावत| बाड़मेर बाड़मेर शहर से महज 5 से 7 किमी. दूरी पर सीवरेज के पानी से 150 हेक्टेयर से ज्यादा के इलाके में जहरीली खेती हो रही है। किसानों ने सीवरेज के नालों से पानी को अपने खेतों तक ले गए है, जहां डिग्गी बनाकर पंप से फव्वारे चलाकर खेती की जा रही है। इससे जीरा, रायड़ा, ईसबगोल सहित कई फसलें उगाई हुई है। खेतों में हरियाली छाई है। हर साल प्रशासन की नाक के आगे खेती कर किसान मालामाल हो रहे है और करोड़ों रुपए की कमाई की जा रही है, जबकि लोगों की थाली तक धीमा जहर परोसा जा रहा है। 10 साल से जहरीली खेती को रोकने में प्रशासन नाकाम रहा है। जिस पानी से खेती हो रही है, उस पानी को बोतल में भरकर दैनिक भास्कर ने टेस्टिंग करवाई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। जिस पानी का उपयोग खेती के लिए हो रहा है, उसकी टर्बिडिटी सामान्य से 600 गुणा अधिक है। यह केवल गंदा पानी नहीं, बल्कि रसायनों का एक ऐसा कॉकटेल है जो इंसान के शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। इससे कई जानलेवा बीमारियों के होने का खतरा है। बाड़मेर. बाड़मेर आगोर पंचायत के पास डिग्गी बनाकर की जा रही खेती। डॉ. योग प्रकाश, पीएसएम, बाड़मेर टर्बिडिटी: भास्कर द्वारा टेस्ट करवाई गई रिपोर्ट में पानी के पैरामीटर्स ने खतरे की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। पानी में अत्यधिक टर्बिडिटी (602 NTU) जो सामान्यत पानी में यह 1 NTU और अधिकतम सीमा 5 NTU होनी चाहिए। यहां यह 602 है। पानी में मिट्टी, सीवरेज के ठोस कण और औद्योगिक कचरा इस कदर घुला है। इस तरह के पानी में नमक और केमिकल अधिक होते हैं, जिससे मिट्टी में लवणीयता बढ़ती है। इससे खेत बंजर होने लगते हैं। यह नुकसान स्थायी होता है। 602 NTU यानि पानी में भारी मात्रा में सीवेज, जैविक अपशिष्ट और रासायनिक कण मौजूद हैं। जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के तहत बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी छोड़ना दंडनीय है। प्रदूषण बोर्ड संबंधित इकाइयों पर भारी जुर्माना और बंदी की कार्रवाई कर सकता है। इसके तहत जेल की सजा का प्रावधान है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत दूषित खाद या पानी से उगाई गई फसल को बाजार में बेचना स्वास्थ्य मानकों का उल्लंघन है। इसके तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। टीडीएस: रिपोर्ट में टीडीएस 1000 mg/L है। हालांकि यह पीने के लिए ऊपरी सीमा पर है, लेकिन इसमें मौजूद अकार्बनिक लवणों की प्रकृति फसलों के लिए हानिकारक है। एल्केनिटी और हार्डनेस: कुल क्षारीयता 500 mg/L और कठोरता 400 mg/L है। यह जमीन की संरचना को हमेशा के लिए बिगाड़ने के लिए काफी है। इसके अलावा क्लोराइड की मात्रा 290 mg/L है, जो लंबे समय में मिट्टी को बंजर बना देती है। प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक सीवरेज के पानी से खेती होती है और उससे तैयार फसलों को सेवन करते है तो इसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और ये हानिकारक है। इससे टाइफाइड, पेट के खराब होने, लिवर, किडनी और कैंसर जैसी बीमारियां होने का खतरा रहता है।


