अमनदीप सिंह | अमृतसर सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने और फ्लाईओवर के नीचे खाली जगह के सही इस्तेमाल के लिए 10 लाख रुपए से बैडमिंटन कोर्ट तैयार किया गया है। मगर 3 माह बाद भी इसे किसी एनजीओ को सौंपा नहीं जा सका। इसलिए यहां धूल जमी है। लोग यहां वाहन खड़े करने लगे है। मॉल ऑफ अमृतसर के पास फ्लाईओवर के नीचे मोड़ प्रताप नगर के पास बने कोर्ट पर खेल गतिविधि शुरू न होने के कारण इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बैडमिंटन कोर्ट लोगों के लिए बनाया गया है, जो भी संस्था इसे मेनटेन करके रख सकती है उसे जल्द हैंडओवर किया जाएगा। कोर्ट की पूरी देख-रेख और संचालन की जिम्मेदारी उसी संस्था की होगी। -जीवनजोत कौर, विधायक हलका ईस्ट . कोई भी रजिस्टर्ड स्पोर्ट्स क्लब, एसोसिएशन या संस्था बैडमिंटन कोर्ट का संचालन कर सकती है। इच्छुक संस्था को नगर निगम में आवेदन करना होगा। . आवेदन में संस्था का रजिस्ट्रेशन प्रमाण, मेंटेनेंस प्लान और संचालन की रूपरेखा देनी होगी। . नगर निगम आवेदन की जांच और सत्यापन करेगा। . पात्र पाए जाने पर कोर्ट को संस्था को हैंडओवर किया जाएगा। . कोर्ट की देख-रेख से लेकर सारी जिम्मेदारी संस्था की होगी। यूथ स्पोर्ट्स एक्टिविटी एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी राजन कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि 3 महीने से ज्यादा समय हो गया है लेकिन बैडमिंटन कोर्ट का इस्तेमाल खेल के लिए नहीं हो रहा। लोग यहां वाहन खड़े कर रहे हैं। सड़क के पास होने के कारण सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं। जाली के आगे लोहे की ग्रिलें नहीं है। प्रशासन की लापरवाही के चलते 10 लाख की यह योजना बेकार होने की कगार पर है। वहीं नगर निगम के एससी संदीप सिंह का कहना है कि जैसे ही किसी एसोसिएशन को कोर्ट हैंडओवर किया जाएगा उसकी नियमित देख-रेख शुरू हो जाएगी। बैडमिंटन कोर्ट की सुरक्षा की लिहाज से इंतजाम अधूरे हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि कोर्ट की 3 साइडों में लोहे की जालीदार ग्रिलें लगाई गई हैं, लेकिन मेन सड़क की ओर एक साइड पूरी तरह खुली है। जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। लोगों का कहना है कि सड़क की ओर भी लोहे की ग्रिल या मजबूत बैरिकेडिंग की जाए, ताकि कोई हादसा न हो।


